शालिग्राम जी की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां! नाराज हो सकते हैं नारायण, जानें शास्त्रों के 5 कड़े नियम
सनातन धर्म और हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान शालिग्राम को साक्षात जगत के पालनहार भगवान विष्णु का विग्रह स्वरूप माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र और वास्तु विज्ञान में यह स्पष्ट कहा गया है कि जिस घर में मर्यादा और शुद्धता के साथ भगवान शालिग्राम विराजमान होते हैं, वहां सदैव मां लक्ष्मी का वास रहता है और परिवार के सदस्यों के जीवन से सभी कष्ट व आर्थिक संकट कोसों दूर रहते हैं। हालांकि, शालिग्राम जी की सेवा और पूजा-अर्चना के नियम बेहद कड़े और विशिष्ट होते हैं। इनकी आराधना में की गई जरा सी भी लापरवाही या भूल इंसान को संकटों के चक्रव्यूह में फंसा सकती है। इसलिए, घर में शालिग्राम जी को स्थापित करने से पहले शास्त्रों में बताए गए इन महत्वपूर्ण नियमों को जानना हर भक्त के लिए अत्यंत आवश्यक है।
घर में कितने शालिग्राम रखना है शुभ: एक से अधिक रखने पर लगता है भारी वास्तु दोष
अक्सर लोग अपनी श्रद्धावश या अनजाने में पूजा घर में एक से अधिक शालिग्राम जी रख लेते हैं, जो कि धार्मिक और वास्तु के नियमों के सर्वथा विरुद्ध है। शास्त्रों के अनुसार, गृहस्थ जीवन जीने वाले लोगों को अपने घर के मंदिर में केवल और केवल एक ही शालिग्राम शिला को विराजमान करना चाहिए। एक से अधिक शालिग्राम घर में रखने से ऊर्जा का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे घर में गंभीर वास्तु दोष (Vastu Dosh) उत्पन्न हो सकता है। नियमों के उल्लंघन से की गई पूजा कभी भी सफल नहीं होती और इसके शुभ फल भी प्राप्त नहीं होते हैं।
तामसिक भोजन और मदिरा पर पूर्ण प्रतिबंध: भूलकर भी न करें यह अपवित्र कार्य
यदि आपने अपने घर में भगवान शालिग्राम को स्थान दिया है, तो आपके पूरे परिवार को अपनी जीवनशैली में सात्विकता को अपनाना अनिवार्य हो जाता है। जिस घर के मंदिर में नारायण स्वरूप शालिग्राम विराजमान हों, वहां के सदस्यों को भूलकर भी मांस, मड़िया, प्याज या लहसुन जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि घर के भीतर अपवित्र आचरण या तामसिक वस्तुओं का प्रवेश होने से भगवान शालिग्राम अत्यंत रुष्ट हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप परिवार को सुख-शांति की हानि और अशुभ फलों का सामना करना पड़ता है।
रोजाना अभिषेक और श्रृंगार का विधान: इस विधि से करें शालिग्राम जी की सेवा
शालिग्राम जी की पूजा में निरंतरता और पवित्रता सबसे अहम भूमिका निभाती है। उन्हें कभी भी गंदे या बिना स्नान किए हाथों से नहीं छूना चाहिए। प्रतिदिन सुबह स्नान के पश्चात गंगाजल, शुद्ध जल अथवा पंचामृत से शालिग्राम जी का श्रद्धापूर्वक अभिषेक करें। अभिषेक के बाद उन्हें एक साफ और स्वच्छ वस्त्र से पोंछकर आसन पर स्थापित करें। इसके बाद शालिग्राम जी को हरिचंदन या गोपीचंदन का तिलक लगाएं, उनके सम्मुख गाय के देसी घी का दीपक प्रज्वलित करें और कर्पूर से आरती करें। पूजा के समय विष्णु मंत्रों का जाप करते हुए उन्हें मौसमी फल और सात्विक मिठाई का भोग अर्पित करें।
भोग में तुलसी दल है सबसे अनिवार्य: इसके बिना नारायण नहीं स्वीकारते अन्न
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान विष्णु को तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) अत्यंत प्रिय हैं और माता तुलसी के बिना शालिग्राम जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। जब भी आप प्रभु को फल, मिष्ठान या पंचामृत का भोग लगाएं, तो उसमें तुलसी का पत्ता जरूर शामिल करें। शास्त्रों में वर्णित है कि यदि भोग में तुलसी पत्र शामिल न हो, तो प्रभु उस अन्न को कभी स्वीकार नहीं करते हैं। इसके साथ ही, रविवार और एकादशी के दिन तुलसी दल तोड़ने से बचना चाहिए, इसलिए पूजा के लिए एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लें।