'मिशन सुदर्शन चक्र' बनेगा देश का अभेद्य सुरक्षा कवच; हैदराबाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भरी हुंकार
हैदराबाद/नई दिल्ली: भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिकता के एक नए स्वर्ण युग की शुरुआत होने जा रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की महत्वाकांक्षी बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली (Multi-layered Missile Defense System) 'मिशन सुदर्शन चक्र' को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बयान दिया है। राजनाथ सिंह ने साफ किया कि यह अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली दुश्मन के हर हवाई हमले को नेस्तनाबूद कर देश के लिए एक ऐसा अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार करेगी, जिससे भारत की संप्रभुता को कोई छू भी नहीं सकेगा।
पीएम मोदी के सपने को साकार करेगा 'मिशन सुदर्शन चक्र'
शनिवार (13 जून 2026) को रक्षा मंत्री ने देशवासियों को याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2025 के स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर लाल किले की प्राचीर से इस मिशन की ऐतिहासिक घोषणा की थी।
इस मिशन के महत्व को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा:
"मिशन सुदर्शन चक्र देश की बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली के रूप में स्थापित होने जा रहा है। यह सिर्फ हमारे अग्रिम सैन्य प्रतिष्ठानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचे (Military Infrastructure) की ही रक्षा नहीं करेगा, बल्कि देश के नागरिक हवाई क्षेत्र, प्रमुख औद्योगिक संस्थानों और आम जनता की सुरक्षा भी पूरी तरह सुनिश्चित करेगा। यह आधुनिक भारत की रक्षा तैयारियों को एक नई और अचूक शक्ति प्रदान करने वाला मील का पत्थर साबित होगा।"
बदल गई जंग की परिभाषा: अब छोटी ताकतें भी दे रही हैं बड़ी चुनौती
हैदराबाद के पास दुंडीगल में स्थित भारतीय वायुसेना अकादमी (Air Force Academy) में कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड (CGP) को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने देश के नव-नियुक्त जांबाज सैन्य अधिकारियों को आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को लेकर बेहद गंभीर सीख दी।
राजनाथ सिंह ने कूटनीतिक और रणनीतिक हकीकत को सामने रखते हुए कहा, "आज के वैश्विक परिदृश्य में उभरती हुई तकनीकों (Emerging Technologies) ने युद्ध की पूरी परिभाषा ही बदल कर रख दी है। पहले एक आम धारणा थी कि वैश्विक महाशक्तियों या बड़ी सैन्य ताकतों को ही युद्धक्षेत्र में निर्णायक बढ़त हासिल होती है। लेकिन आज की सच्चाई यह है कि तुलनात्मक रूप से छोटी ताकतें और गैर-राज्य तत्व (Non-state Actors) भी अपने छोटे, सस्ते लेकिन बेहद घातक हथियारों और अपरंपरागत रणनीतियों से बड़ी ताकतों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।"
रडार, उपग्रह और रोबोटिक्स का दौर: मानसिक रूप से तैयार रहें युवा अधिकारी
वायुसेना के नए अधिकारियों को भविष्य के संघर्षों के लिए मानसिक रूप से सुदृढ़ रहने की सलाह देते हुए राजनाथ सिंह ने तकनीक के दौर की चुनौतियों को गिनाया। उन्होंने कहा कि पहले के दौर में दुश्मन के सैनिक और सैन्य उपकरण आमने-सामने स्पष्ट रूप से दिखाई देते थे, जिससे रणनीतियां पारंपरिक होती थीं।
उन्होंने आगे कहा:
आधुनिक प्रणालियों का दबदबा: आज का युद्ध मैदान में कम और कंप्यूटर स्क्रीन, रडार, सैटेलाइट, स्वाम ड्रोन, सेंसर और रोबोटिक्स प्रणालियों के जरिए ज्यादा लड़ा जा रहा है।
साइबर और लॉजिस्टिक्स वॉरफेयर: अब ऐसे अदृश्य साइबर हमले देखने को मिल रहे हैं, जिनमें सीधे विरोधियों के ट्रैफिक सिस्टम, कम्यूनिकेशन नेटवर्क और सीसीटीवी कैमरों को हैक कर उनके नियंत्रण को पंगु बना दिया जाता है।
बदलाव को अपनाएं: सेना में शामिल हो रहे युवा अधिकारियों को इन आधुनिक तरीकों और हाइब्रिड वॉरफेयर की रणनीतियों को गहराई से समझना होगा। उन्हें समय के साथ खुद को ढालना होगा, इन तकनीकों को अपनाना होगा और जरूरत पड़ने पर दुश्मन को मात देने के लिए अपनी युद्ध रणनीतियों में तत्काल बदलाव करने की कला सीखनी होगी।