स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम सुतार का निधन, भारतीय कला जगत को बड़ी क्षति
India News Live,Digital Desk : प्रख्यात मूर्तिकार राम सुतार का निधन हो गया है। उन्होंने लगभग 100 वर्ष की आयु में नोएडा के सेक्टर 19 स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उन्होंने विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का डिजाइन तैयार किया था। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार "महाराष्ट्र भूषण" से सम्मानित किया था। इससे पहले उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और टैगोर पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका था।
राम सुतार का जन्म 19 फरवरी, 1925 को महाराष्ट्र के धुले जिले के गोंदुर गांव में एक साधारण बढ़ई परिवार में हुआ था। बचपन से ही कला के प्रति उनका गहरा लगाव था। उनकी प्रतिभा को उनके गुरु रामकृष्ण जोशी ने पहचाना और उन्हें मुंबई के प्रतिष्ठित जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स में दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित किया। यहीं से उनकी मूर्तिकला की यात्रा शुरू हुई, जिसने बाद में उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई।
उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और मूर्तिकला में लग गए।
1959 में राम सुतार दिल्ली आए और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में काम करने लगे। हालांकि, कला के प्रति उनका समर्पण इतना गहरा था कि उन्होंने बाद में सरकारी नौकरी छोड़ दी और अपना पूरा जीवन मूर्तिकला को समर्पित कर दिया। 1961 में गांधी सागर बांध पर बनी उनकी 45 फुट ऊंची देवी चंबल की प्रतिमा ने उन्हें राष्ट्रीय ख्याति दिलाई। इसके बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण कृतियों का निर्माण किया, जिनमें संसद भवन परिसर में स्थित गोविंद वल्लभ पंत की प्रतिष्ठित प्रतिमा भी शामिल है।
संसद भवन परिसर में स्थापित महात्मा गांधी की ध्यान मुद्रा में प्रतिमा उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है। महाराजा रणजीत सिंह, छत्रपति शाहू महाराज, इंदिरा गांधी, जयप्रकाश नारायण, महात्मा फुले, पंडित नेहरू और शिवाजी महाराज की प्रतिमाएं भी देश के विभिन्न हिस्सों में स्थापित हैं।
इन प्रसिद्ध मूर्तियों को आकार देने वाले
राम सुतार ने पत्थर, संगमरमर और कांसे सहित विभिन्न माध्यमों में काम किया, लेकिन कांसा उनकी पसंदीदा धातु थी। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति गुजरात में स्थित 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी है, जो विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा है। बेंगलुरु में स्थित विशाल शिव प्रतिमा, पुणे के मोशी में संभाजी महाराज की प्रतिमा और अयोध्या के लता मंगेशकर चौक पर स्थापित विशाल वीणा भी उनकी कला के उदाहरण हैं। दक्षिण गोवा के श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ में भगवान राम की 77 फुट ऊंची भव्य कांसे की प्रतिमा राम सुतार की नवीनतम कृति है।