रजिस्ट्री में हर कोई खुद को समझता है सुपर चीफ जस्टिस, CJI सूर्यकांत का फूटा गुस्सा, ED को लेकर कही ये बड़ी बात

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India News Live, Digital Desk: देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के भीतर आज एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सबको हैरान कर दिया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत सोमवार को एक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के कामकाज पर बुरी तरह बिफर पड़े। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि रजिस्ट्री में बैठा हर व्यक्ति खुद को भारत का 'सुपर चीफ जस्टिस' समझने लगा है। कोर्ट रूम में CJI के इस रौद्र रूप को देखकर वहां मौजूद वकील और अधिकारी सन्न रह गए।

CJI सूर्यकांत ने क्यों कहा 'सुपर चीफ जस्टिस'? 

मामला आयुषी मित्तल बनाम राजस्थान राज्य की सुनवाई से जुड़ा था। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच उस समय नाराज हो गई जब उन्हें पता चला कि अदालत के पुराने आदेश के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी नहीं किया गया। CJI ने रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, "सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री बहुत ही खराब तरीके से काम कर रही है। रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल इस बात की जांच करें कि हमारे मार्च 2026 के आदेश का मतलब ED को नोटिस क्यों नहीं माना गया? आखिर किस हैसियत से आदेश को नजरअंदाज किया गया?"

37,000 करोड़ का महाघोटाला और ज़मानत की अर्जी पूरा मामला आयुषी मित्तल उर्फ आयुषी अग्रवाल से जुड़ा है, जिन पर 37,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश घोटाले में शामिल होने का गंभीर आरोप है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से जमानत की गुहार लगाई थी। सुनवाई के दौरान बेंच ने हैरानी जताई कि जब 23 मार्च को ही आदेश दे दिया गया था कि ED को इस मामले में पक्ष बनाया जाए, तो फिर अब तक नोटिस क्यों नहीं भेजा गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रवर्तन निदेशालय को तुरंत नोटिस भेजा जाए और रजिस्ट्री की इस बड़ी प्रशासनिक चूक की जांच हो।

पूरी संपत्ति का ब्यौरा दिए बिना नहीं मिलेगी राहत अदालत ने साफ कर दिया कि जब तक याचिकाकर्ता और उनके पूरे परिवार की संपत्तियों का "विस्तृत विवरण" सामने नहीं आता, तब तक जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा। बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया कि वे एक हलफनामा दाखिल करें, जिसमें आयुषी मित्तल, उनके पति, बच्चों, माता-पिता, भाई-बहनों और यहाँ तक कि सास-ससुर की अचल संपत्तियों की पूरी जानकारी हो। कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि क्या घोटाले से जुड़ी सभी संपत्तियों को सही तरीके से कुर्क (Attach) किया गया है या नहीं।

मई में होगी अगली सुनवाई, रजिस्ट्रार को जांच के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी के निदेशकों, प्रबंधकों और मुख्य कर्मचारियों की संपत्तियों का विवरण भी मांगा है। जस्टिस सूर्यकांत ने दो टूक कहा कि जब तक पूरी जानकारी नहीं मिल जाती, हम मेरिट के आधार पर जमानत पर बात नहीं करेंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को निर्देश दिया कि वह कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करें। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई मई में किसी भी दिन तय की जा सकती है।