CJI Gavai said : जजों पर झूठे आरोप लगाना नया चलन बन गया है, ऐसी हरकतों की कड़ी निंदा होनी चाहिए

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India News Live,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने सोमवार को एक अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब अदालत किसी पक्ष के पक्ष में आदेश नहीं देती, तो उस जज पर झूठे या गलत आरोप लगाने का चलन बढ़ता जा रहा है, जो बेहद चिंता का विषय है।

सीजेआई गवई, जो 23 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं, एन. पेड्डी राजू से जुड़े एक अवमानना मामले की सुनवाई कर रहे थे। इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने राजू को फटकार लगाई थी, क्योंकि उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट की जज, जस्टिस मौशुमी भट्टाचार्य के खिलाफ अनुचित टिप्पणी की थी।

“जजों पर आरोप लगाना न्याय व्यवस्था के लिए खतरा”

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने बताया कि जस्टिस भट्टाचार्य ने राजू की माफी स्वीकार कर ली है, जिसके बाद हाई कोर्ट ने मामला बंद कर दिया। लेकिन इस पर सीजेआई गवई ने असहमति जताई और कहा कि ऐसी हरकतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा — “ऐसी हरकतों की कड़ी निंदा होनी चाहिए।”

बेंच ने कहा, “हमारी अदालत पहले भी साफ कर चुकी है कि वकील, अदालत के अधिकारी होते हैं और उन्हें न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। कानून की असली ताकत सजा देने में नहीं, बल्कि माफी स्वीकार करने में है। चूंकि संबंधित जज ने माफी स्वीकार कर ली है, इसलिए हम आगे कोई कार्रवाई नहीं करेंगे। लेकिन वकीलों को यह समझना चाहिए कि किसी जज के खिलाफ आरोप लगाने से पहले उन्हें बहुत सतर्क रहना चाहिए।”

वकीलों को मिली चेतावनी

जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता और उसके वकीलों को नोटिस जारी किया था, क्योंकि उन्होंने तेलंगाना हाई कोर्ट के जज पर पक्षपात के आरोप लगाए थे। उस समय कोर्ट ने कहा था कि वह किसी को भी जज के खिलाफ इस तरह के आरोप लगाने की अनुमति नहीं दे सकता।

तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी से जुड़ा मामला

यह मामला तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से जुड़ा है। उन्हें SC/ST एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में हाई कोर्ट से राहत मिली थी। बाद में याचिकाकर्ता ने जज पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए केस ट्रांसफर की मांग की और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।