BSF leadership changed amid terrorist attacks : सरकार का बड़ा फैसला
India News Live,Digital Desk : केंद्र सरकार ने 3 अगस्त 2024 को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी दलजीत सिंह चौधरी को सीमा सुरक्षा बल (BSF) का नया महानिदेशक नियुक्त किया। इससे पहले वे सशस्त्र सीमा बल (SSB) के DG के रूप में तैनात थे। यह बदलाव उस समय हुआ, जब जम्मू क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगातार आतंकी हमले हो रहे थे, जिनमें सुरक्षा कर्मियों और नागरिकों की जानें भी गई थीं। ऐसे माहौल में केंद्र ने BSF के नेतृत्व में तत्काल बदलाव करने का फैसला लिया।
BSF देश की पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश की निगरानी करती है। घुसपैठ रोकने, तस्करी पर लगाम लगाने और सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी इसी बल की होती है।
कौन हैं दलजीत सिंह चौधरी?
दलजीत सिंह चौधरी यूपी कैडर के 1990 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं।
उनका जन्म 25 नवंबर 1965 को दिल्ली में हुआ।
34 साल की सेवा में उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।
वे 2017 से लगातार केंद्र में डिपुटेशन पर हैं।
उन्होंने ITBP में ADG, CRPF में स्पेशल DG और ADG, और SSB में DG के तौर पर नेतृत्व संभाला है।
वे उत्कृष्ट मार्क्समैन माने जाते हैं और क्वालिफाइड स्काइडाइवर भी हैं।
सेवा और पुरस्कार
IPS दलजीत सिंह चौधरी को अब तक चार पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री, पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस, राष्ट्रपति पुलिस पदक फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस और अति उत्कृष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि में उन्होंने BSc और LLB की पढ़ाई की है।
रिटायरमेंट से पहले भावुक पल
दलजीत सिंह चौधरी 30 नवंबर 2025 को रिटायर होने वाले हैं। इस बीच दिल्ली में BSF के जवानों और कर्मचारियों ने उन्हें एक भावुक विदाई दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब साझा किया जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक विदाई 30 नवंबर को ही दी जाएगी।
फिलहाल वे रायपुर में चल रहे DGP–IGP सम्मेलन में शामिल हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे।
BSF कैसे बनी? एक ऐतिहासिक बदलाव की कहानी
1965 से पहले भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा राज्य पुलिस के हाथ में थी। लेकिन 9 अप्रैल 1965 को पाकिस्तान ने कच्छ क्षेत्र में सरदार पोस्ट, छार बेट और बेरिया बेट पर हमला किया। इस हमले ने यह साफ कर दिया कि सीमाओं की रक्षा के लिए एक संगठित और अधिक सक्षम बल की जरूरत है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र ने सचिवों की समिति की सिफारिश पर एक केंद्र-नियंत्रित सीमा बल बनाने का फैसला लिया।
इसके बाद 1 दिसंबर 1965 को सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थापना हुई, जो आज देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा में सबसे अहम भूमिका निभाती है।