AI से साइबर अपराधियों पर बड़ा वार! RBI का ‘MuleHunter’ फर्जी बैंक खातों की करेगा पहचान, डिजिटल फ्रॉड करने वालों की खैर नहीं
India News Live, Digital Desk : भारत में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड और डिजिटल ठगी को रोकने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली जा रही है। देश के केंद्रीय बैंक Reserve Bank of India ने साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए एक खास AI टूल ‘MuleHunter’ को लागू करने की तैयारी की है। यह तकनीक ऐसे बैंक खातों की पहचान करेगी जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी फर्जी लेनदेन और डिजिटल ठगी के लिए करते हैं।
क्या है ‘MuleHunter’ AI टूल
Reserve Bank of India की सहायक संस्था Reserve Bank Innovation Hub द्वारा विकसित यह AI आधारित टूल बैंकिंग सिस्टम में मौजूद म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) की पहचान करेगा। म्यूल अकाउंट वे खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अपराधी धोखाधड़ी से प्राप्त पैसे को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
माना जा रहा है कि MuleHunter लाखों बैंक खातों के डेटा का विश्लेषण करके संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाएगा और ऐसे खातों को चिन्हित कर बैंकिंग सिस्टम से हटाने में मदद करेगा।
डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी पर लगेगी लगाम
पिछले कुछ समय में भारत में डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन स्कैम और फर्जी कॉल सेंटर के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी के मामले सामने आए हैं। साइबर अपराधी अक्सर भोले-भाले लोगों को डराकर या झांसा देकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं और फिर इन पैसों को म्यूल अकाउंट्स के जरिए छिपाने की कोशिश करते हैं।
नई AI तकनीक ऐसे नेटवर्क को जल्दी पहचानने में मदद करेगी और फर्जी खातों को बंद करने की प्रक्रिया को तेज बनाएगी।
बैंकिंग सिस्टम में बढ़ेगी सुरक्षा
विशेषज्ञों के मुताबिक MuleHunter के लागू होने के बाद बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगी। इससे न सिर्फ साइबर अपराधियों पर दबाव बढ़ेगा बल्कि आम ग्राहकों के पैसे भी ज्यादा सुरक्षित रहेंगे।
Reserve Bank of India का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम आने वाले समय में साइबर अपराध से निपटने का सबसे प्रभावी हथियार साबित हो सकते हैं।
साइबर फ्रॉड के खिलाफ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
भारत में डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही साइबर अपराध भी तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में बैंकिंग सेक्टर में AI और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके संदिग्ध लेनदेन और खातों की पहचान करना जरूरी हो गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तकनीक को सभी बैंकों में प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो साइबर फ्रॉड के मामलों में काफी कमी आ सकती है।