Bharat Milap of Varanasi : राष्ट्रीय धरोहर बनने की राह पर

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India News Live,Digital Desk : वाराणसी के नाटीइमली में आयोजित होने वाले पौराणिक और ऐतिहासिक भारत मिलाप को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग सामने आई है। शतरुद्र प्रकाश ने हाल ही में एक पत्र जारी कर कहा कि इस सांस्कृतिक स्थल को सुरक्षित रखने के लिए इसके आसपास हो रहे अवैध निर्माण, खासकर बहुमंजिली इमारतों पर रोक लगाना बेहद जरूरी है।

उन्होंने चेताया कि अगर ऐसा नहीं किया गया, तो क्षेत्र का मूल स्वरूप संकुचित हो जाएगा और राम, लक्ष्मण और भारत-शत्रुघ्न का दौड़ते हुए मिलाप का दृश्य सूरज ढलने से पहले ही धूमिल हो जाएगा।

शतरुद्र प्रकाश ने बताया कि वर्षों की मेहनत के बाद उन्होंने इस स्थल को वाराणसी महायोजना 2031 में सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर क्षेत्र की सूची में शामिल करवाया। महायोजना के प्रस्तर 2.4 पृष्ठ 21 में इसे 7वें स्थान पर रखा गया। इससे पहले इस सूची में केवल छह क्षेत्र शामिल थे, और भारत मिलाप का नाम नहीं था। उत्तर प्रदेश सरकार ने तभी इस महायोजना को मंजूरी दी जब नाटीइमली का भारत मिलाप सातवें स्थान पर शामिल किया गया।

साथ ही, राम-भारत के मिलाप के मार्ग को मजबूत करने के लिए इंटरलाकिंग का काम किया गया है, हालांकि अभी इसमें कुछ सुधार किए जाने बाकी हैं। महायोजना 2031 को वाराणसी दैनिक जागरण और हिंदुस्तान में 20 जुलाई 2017 को प्रकाशित किया गया था।

इस प्रस्तर में साफ तौर पर लिखा गया है कि वाराणसी हिंदुओं का प्राचीन तीर्थ स्थल है और यहां ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की प्रमुखता है। देश-विदेश से पर्यटक और शोधकर्ता इन स्थलों, मठों और मंदिरों को देखने आते रहते हैं। नगर के पुरातात्विक, ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को महायोजना 2031 में सात भागों में वर्गीकृत किया गया है:

गंगातटीय घाट और मंदिर क्षेत्र

दुर्गा मंदिर, संकटमोचन मंदिर, मानस मंदिर क्षेत्र

कमच्छा भेलूपुर क्षेत्र

कबीर मठ (लहरतरा) क्षेत्र

सारनाथ क्षेत्र

पंचकोसी यात्रा क्षेत्र

नाटीइमली (भारत मिलाप)

पत्र में यह भी बताया गया है कि इन सात धरोहरों को महायोजना 2031 में किसी भी रूप में मिटाया या हटा नहीं सकते। यह आवश्यक है कि काशी के विश्वप्रसिद्ध भारत मिलाप का मूल स्वरूप हमेशा सुरक्षित रखा जाए।

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