बंगाल चुनाव: सावधान! खाली कर दें दीघा और मंदारमणि के तट, चुनाव आयोग का 'सख्त' आदेश
India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से ठीक पहले निर्वाचन आयोग (EC) ने एक ऐसा अभूतपूर्व कदम उठाया है, जिसने पर्यटकों और होटल कारोबारियों के बीच हलचल मचा दी है। सूबे के चुनावी इतिहास में संभवतः यह पहली बार है जब आयोग ने किसी अशांति की आशंका को देखते हुए लोकप्रिय पर्यटक स्थलों को खाली करने का फरमान जारी किया है।
पर्यटकों को इलाका छोड़ने का फरमान: दीघा-मंदारमणि में सन्नाटा
निर्वाचन आयोग के ताजा निर्देश के अनुसार, पूर्वी मेदिनीपुर जिले के सबसे चर्चित तटीय स्थलों—दीघा, मंदारमणि, ताजपुर, उदयपुर और शंकरपुर—से सभी पर्यटकों और गैर-निवासियों को फौरन बाहर जाने को कहा गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि होटलों और रिसॉर्ट्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके यहां कोई भी ऐसा व्यक्ति न ठहरे जो उस जिले का मूल निवासी नहीं है।
कब तक प्रभावी रहेगा यह आदेश?
आयोग ने सुरक्षा के लिहाज से समय सीमा भी तय कर दी है। यह प्रतिबंध मंगलवार शाम 6 बजे से लागू हो चुका है और 23 अप्रैल को मतदान की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेगा। यानी अगले 48 घंटों तक इन खूबसूरत समुद्री तटों पर सैलानियों की आवाजाही पूरी तरह बंद रहेगी। पुलिस प्रशासन ने सोमवार रात से ही दीघा और मंदारमणि की तटरेखाओं पर लाउडस्पीकर के जरिए घोषणाएं शुरू कर दी थीं, ताकि पर्यटक समय रहते सुरक्षित बाहर निकल सकें।
बाहरी उपद्रवियों पर लगाम कसने की तैयारी
चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस कड़े फैसले के पीछे का तर्क साझा करते हुए बताया कि खुफिया इनपुट्स के अनुसार, कुछ बाहरी तत्व पर्यटन की आड़ में जिले में प्रवेश कर चुनावी माहौल बिगाड़ सकते हैं। "वास्तविक पर्यटकों को हटाने का मकसद केवल यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी उपद्रवी 'पर्यटक' बनकर न छिपा रहे और मतदान के दौरान शांति भंग न हो।"
नियम तोड़ने पर होगी जेल, प्रचारकों पर भी पाबंदी
यह आदेश केवल आम जनता के लिए ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के बाहरी प्रचारकों के लिए भी उतना ही सख्त है। जो नेता या प्रचारक उस क्षेत्र के मतदाता नहीं हैं, उन्हें भी तुरंत इलाका छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें दोषी पाए जाने पर 6 महीने से लेकर 1 साल तक की कैद का प्रावधान है।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर बड़ा असर
पूर्वी मेदिनीपुर का यह तटीय बेल्ट बंगाल के पर्यटन की रीढ़ माना जाता है। रामनगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इन स्थलों के अचानक बंद होने से होटल उद्योग को तगड़ा झटका लगा है। हालांकि, आयोग का मानना है कि निष्पक्ष और हिंसा मुक्त मतदान कराने के लिए यह 'असाधारण' कदम उठाना अनिवार्य था।