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June 29 2026 03:58 am

Badrinath Opening: कल खुलेंगे बदरीनाथ के कपाट, 3 चाबियों का 'रहस्य' और मूर्ति पर घी के लेप का अनोखा संकेत

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India News Live,Digital Desk : देवभूमि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा का उत्साह चरम पर है। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के ठीक एक दिन बाद, यानी 23 अप्रैल 2026 को प्रातः 6:15 बजे भगवान श्री बदरीनाथ के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। मंगलवार को शीतकालीन पूजा स्थली नृसिंह मंदिर से भगवान की उत्सव डोलियां जयघोष के साथ धाम के लिए रवाना हो चुकी हैं। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया जितनी भव्य है, उतनी ही रहस्यमयी और रोचक भी है।

एक नहीं, तीन चाबियों से खुलता है 'स्वर्ग का द्वार'

बदरीनाथ धाम के कपाट किसी साधारण ताले से नहीं, बल्कि एक विशेष परंपरा के तहत खुलते हैं। मंदिर का ताला खोलने के लिए तीन अलग-अलग चाबियों का प्रयोग किया जाता है, जो तीन अलग-अलग वर्गों के पास सुरक्षित रहती हैं:

प्रथम चाबी: टिहरी राजपरिवार के कुल पुरोहित के पास होती है।

द्वितीय एवं तृतीय चाबी: बद्रीनाथ धाम के हक-हकूकधारी मेहता और भंडारी समाज के पास रहती है।

जब ये तीनों चाबियां एक साथ लगाई जाती हैं, तभी मंदिर के कपाट खुलते हैं। यह परंपरा सदियों से आपसी विश्वास और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनी हुई है।

मूर्ति पर घी का लेप: देश की खुशहाली का 'बैरोमीटर'

कपाट खुलने के बाद सबसे पहले जो दृश्य दिखता है, उसका पूरे देश के लिए बड़ा धार्मिक महत्व है।

घी का लेप: शीतकाल में जब कपाट बंद किए जाते हैं, तब भगवान बदरीनाथ की मूर्ति पर घी का भारी लेप किया जाता है और उन्हें ऊनी कंबल (माणा गांव की कन्याओं द्वारा बुना हुआ) ओढ़ाया जाता है।

भविष्यवाणी का संकेत: छह महीने बाद जब आज कपाट खुलेंगे, तो सबसे पहले उस घी के लेप की स्थिति देखी जाती है।

यदि मूर्ति पर घी का लेप ताजा और भरपूर मिलता है, तो माना जाता है कि उस वर्ष देश में सुख, समृद्धि और खुशहाली आएगी।

यदि घी सूख जाए या कम मिले, तो इसे अकाल या सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा का संकेत माना जाता है।

पुष्प वर्षा के बीच रवाना हुईं देव डोलियां

मंगलवार को नृसिंह मंदिर प्रांगण में महालक्ष्मी पूजन के बाद गरुड़ की डोली, आदि शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा (तेल कलश) को बदरीनाथ के लिए रवाना किया गया।

भक्तों का हुजूम: जोशीमठ के नृसिंह मठांगन से लेकर पेट्रोल पंप तक करीब एक किलोमीटर के दायरे में स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों ने डोलियों पर फूलों की बारिश की।

रात्री विश्राम: बुधवार को यह डोलियां पांडुकेश्वर में विश्राम करेंगी, जिसके बाद गुरुवार तड़के बदरीनाथ धाम पहुंचकर कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू होगी।

बीकेटीसी (BKTC) के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती के अनुसार, इस बार यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है और नृसिंह मंदिर को भी भव्य रूप से फूलों से सजाया गया है। रावल अमरनाथ नंबूदरी ने विष्णुप्रयाग में विशेष पूजा अर्चना कर यात्रा के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना की है।