Great Place to Work 2026: भारत की टॉप 100 बेस्ट वर्कप्लेस कंपनियों में चमका वेदांता ग्रुप, युवाओं और डायवर्सिटी पर जताया भरोसा
बिजनेस डेस्क: उद्योगपति अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप (Vedanta Group) ने कॉर्पोरेट जगत में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 'ग्रेट प्लेस टू वर्क इंडिया' (Great Place to Work India) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वेदांता को साल 2026 के लिए भारत की काम करने के लिए टॉप 100 बेहतरीन कंपनियों (Best Workplaces) की सूची में शामिल किया गया है।
यह मान्यता वेदांता ग्रुप द्वारा अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले भरोसेमंद, हाई-परफॉर्मेंस और सबको साथ लेकर चलने वाले (इंक्लूसिव) शानदार वर्क कल्चर को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार, वेदांता एक ऐसा माहौल तैयार करने में सफल रहा है जहां कर्मचारियों को न सिर्फ काम करने की बल्कि लीक से हटकर सोचने और अपनी क्रिएटिविटी दिखाने की पूरी आजादी मिलती है।
ESOP के जरिए कर्मचारियों को बनाया अमीर, बांटे ₹2,500 करोड़ के शेयर
वेदांता ग्रुप सिर्फ अपने बिजनेस ग्रोथ के लिए ही नहीं, बल्कि अपने कर्मचारियों की वेल्थ क्रिएशन (संपत्ति निर्माण) के लिए भी जाना जाता है। रिपोर्ट में एक बेहद दिलचस्प आंकड़ा सामने आया है कि पिछले पांच वर्षों में वेदांता ने अपने व्यापक ESOP (एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन प्रोग्राम) के जरिए कर्मचारियों के लिए लगभग 2,500 करोड़ रुपये की संपत्ति बनाने में मदद की है। इसका मतलब है कि कंपनी के मुनाफे और तरक्की में वहां के कर्मचारियों को सीधे तौर पर हिस्सेदार बनाया गया है, जो उनके बीच कंपनी के प्रति भरोसे को कई गुना बढ़ाता है।
युवाओं और महिलाओं का बोलबाला: बदल गया कंपनी का वर्कफोर्स प्रोफाइल
वेदांता का वर्कफोर्स अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा युवा और विविध (Diverse) हो चुका है। कंपनी द्वारा जारी किए गए हालिया आंकड़े इसकी गवाही देते हैं:
यंग वर्कफोर्स (40% युवा): वर्तमान में वेदांता के कुल कार्यबल में से 40 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी 30 वर्ष से कम उम्र के हैं, जो यह दिखाता है कि ग्रुप नए विचारों और युवा जोश पर कितना भरोसा कर रहा है।
महिला सशक्तिकरण (23% भागीदारी): पारंपरिक रूप से भारी उद्योगों (Heavy Industries) में महिलाओं की संख्या कम मानी जाती है, लेकिन वेदांता में महिलाओं की हिस्सेदारी अब बढ़कर 23 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।
समावेशी संस्कृति (Transgender Inclusion): समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा में लाने के प्रयास के तहत कंपनी के साथ अब तक लगभग 100 ट्रांसजेंडर प्रोफेशनल्स भी जुड़ चुके हैं, जो कॉर्पोरेट जगत में डायवर्सिटी की एक अनूठी मिसाल है।
10 करोड़ कर्मचारियों के सर्वे पर आधारित है 'ग्रेट प्लेस टू वर्क' की रिपोर्ट
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 'ग्रेट प्लेस टू वर्क' को वर्कप्लेस कल्चर और एम्प्लॉई सैटिस्फैक्शन के मामले में दुनिया की सबसे विश्वसनीय और ग्लोबल अथॉरिटी माना जाता है। साल 1992 से यह संगठन पूरी दुनिया में एक बेहद सख्त और रिसर्च-बेस्ड पद्धति के जरिए कंपनियों के वर्क कल्चर का मूल्यांकन करता आ रहा है। यह संगठन अब तक वैश्विक स्तर पर 10 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों का सर्वे कर चुका है, जिसके बाद ही बेस्ट वर्कप्लेस का चुनाव किया जाता है।
भविष्य के लिए तैयार हो रहा है वेदांता: CHRO नेहा शर्मा का बड़ा बयान
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर खुशी जताते हुए वेदांता ग्रुप की CHRO (मुख्य मानव संसाधन अधिकारी) नेहा शर्मा ने कहा:
"यह पहचान उस सोच और बदलाव को बयां करती है जिसके साथ हम भविष्य के लिए वेदांता को तैयार कर रहे हैं। हम अपने वर्कप्लेस को नए सिरे से डिजाइन कर रहे हैं। इसके लिए हम युवा वर्कफोर्स को सशक्त बना रहे हैं, महिलाओं और कम प्रतिनिधित्व वाले सामाजिक समूहों के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। हमारा ध्यान सिर्फ बेहतरीन टैलेंट को अपनी ओर आकर्षित करने पर नहीं है, बल्कि एक ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने पर है जहां हमारे लोग बिजनेस के विकास के साथ-साथ खुद भी आगे बढ़ सकें।"
रियल एस्टेट सेक्टर में एंट्री के साथ बढ़ेंगे रोजगार के नए मौके
वेदांता ग्रुप का मुख्य कारोबार मुख्य रूप से मेटल्स, क्रिटिकल मिनरल्स, एनर्जी (ऊर्जा) और सेमीकंडक्टर जैसी अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में फैला हुआ है। लेकिन कंपनी यहीं रुकने वाली नहीं है; हाल ही में समूह ने रियल एस्टेट सेक्टर में भी कदम रखने के लिए एक नई कंपनी की शुरुआत की है। इस नए विस्तार से आने वाले समय में रोजगार के और भी कई बड़े और बेहतरीन अवसर पैदा होने की उम्मीद है।