June 23 2026 08:07 am

आजम खान की मुश्किलें बढ़ीं, शत्रु संपत्ति मामले में नई धाराओं पर कानूनी दांवपेंच शुरू

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India News Live,Digital Desk : समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान के खिलाफ शत्रु संपत्ति से जुड़े मामले में एक बार फिर कानूनी घेरा कसता नजर आ रहा है। आरोप है कि कागजों में हेरफेर कर इस संपत्ति को जौहर विश्वविद्यालय में मिलाने की कोशिश की गई थी। सरकारी गवाह बने एक लेखपाल के बयान के आधार पर अब पुलिस ने उन पर तीन और गंभीर धाराएं जोड़ दी हैं।

एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में आजम खान को 1 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। वहीं, उनके वकील का कहना है कि हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जानबूझकर आगे की विवेचना कर साजिशन तीन धाराएं जोड़ी गईं। इसी आधार पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की है। अगर वहां से राहत नहीं मिली, तो आजम खान की मुश्किलें और गहरी हो सकती हैं।

मामला कहां से शुरू हुआ?

यह मुकदमा सबसे पहले मई 2020 में सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुआ था। शिकायत कलक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम के सहायक अभिलेखपाल मोहम्मद फरीद ने दी थी। मामला मूल रूप से लखनऊ के पीरपुर हाउस निवासी सैयद आफाक अहमद और अज्ञात लोगों के खिलाफ था।

दरअसल, जिस जमीन को लेकर विवाद है, वह इमामुद्दीन कुरैशी के नाम दर्ज थी, जो देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए थे। साल 2006 में इस जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया। जांच में सामने आया कि रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर आफाक अहमद का नाम गलत तरीके से दर्ज किया गया था। दस्तावेजों के कई पन्ने फटे मिले।

इसी आधार पर आजम खान, उनकी पत्नी तजीन फातिमा, बेटे अब्दुल्ला और जौहर ट्रस्ट के कई सदस्यों को आरोपित बनाया गया। खास बात यह है कि ट्रस्ट में ज्यादातर सदस्य आजम खान का ही परिवार है।

गवाह बने पूर्व कर्मचारी

इस केस में कलक्ट्रेट के रिटायर्ड कर्मचारी भगवंत भी आरोपित थे, लेकिन बाद में वह सरकारी गवाह बन गए। उनके बयान के आधार पर पुलिस ने आगे की जांच की और फिर आईपीसी की धारा 467, 471 और 201 जोड़ दी। ये धाराएं नकली दस्तावेज बनाने, धोखाधड़ी और साक्ष्य मिटाने से जुड़ी हैं। इनके तहत आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

दोनों पक्षों की दलीलें

अभियोजन पक्ष का कहना है कि आजम खान ने निजी फायदे के लिए अपनी राजनीतिक और सामाजिक हैसियत का गलत इस्तेमाल किया और सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करवाई।

वहीं बचाव पक्ष का तर्क है कि इस केस में पहले ही चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी और सभी आरोपितों को जमानत भी मिल चुकी थी। लेकिन जब हाईकोर्ट ने दूसरे मामले में आजम खान को जमानत दे दी, तो उन्हें जेल में रखने के लिए साजिशन नई धाराएं जोड़ दी गईं। उनका कहना है कि अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है और वहां से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है।