कल्याण-डोंबिवली में सत्ता की बाज़ी पलटने की कोशिश? यूबीटी के दो पार्षदों के ‘गायब’ होने से मचा सियासी हड़कंप
India News Live,Digital Desk : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर पोस्ट-पोल ड्रामा सुर्खियों में है। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) में नतीजे आने के बाद उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (यूबीटी) ने बड़ा आरोप लगाते हुए पुलिस का दरवाज़ा खटखटाया है। पार्टी का दावा है कि उसके दो नवनिर्वाचित पार्षद अचानक ‘लापता’ हो गए हैं और उनका संपर्क एकनाथ शिंदे गुट से बताया जा रहा है।
नगर निगम चुनाव के बाद शुरू हुई यह सियासी खींचतान अब सत्ता गठन की निर्णायक लड़ाई में बदलती नजर आ रही है। किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने से जोड़-तोड़ और संपर्कों का दौर तेज हो गया है।
नतीजों के बाद बढ़ी सियासी सरगर्मी
16 जनवरी 2026 को घोषित केडीएमसी चुनाव परिणामों में शिवसेना (शिंदे गुट) सबसे आगे रही, लेकिन बहुमत से कुछ कदम पीछे रह गई। शिंदे गुट को 53 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा ने 50 सीटों पर जीत दर्ज की। उद्धव ठाकरे गुट को 11 और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को 5 सीटें हासिल हुईं। कुल 122 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा 61 है।
एमएनएस का झुकाव और बढ़ती हलचल
नतीजों के बाद एमएनएस के पांचों पार्षदों ने शिंदे गुट को समर्थन दे दिया, जिससे उनका आंकड़ा 58 तक पहुंच गया। इसी बीच यूबीटी के जिला प्रमुख शरद पाटिल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि पार्टी के दो पार्षदों से संपर्क टूट गया है और उनके शिंदे गुट के संपर्क में होने की आशंका है।
सूत्रों के अनुसार, यूबीटी के बाकी पार्षदों में भी असमंजस का माहौल है। वहीं शिंदे गुट की नजर एनसीपी (शरद पवार) और कांग्रेस के कुछ पार्षदों पर भी बताई जा रही है।
सत्ता समीकरण बदलने की आशंका
अगर यूबीटी के पार्षदों के शिंदे गुट में जाने की बात सही साबित होती है, तो गठबंधन का आंकड़ा 65 से 72 सीटों तक पहुंच सकता है। ऐसे में भाजपा की भूमिका सीमित हो सकती है और सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम में कल्याण से सांसद और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे की भूमिका भी चर्चा में है। राजनीतिक गलियारों में उन्हें इस पोस्ट-पोल रणनीति का अहम चेहरा माना जा रहा है।
चुनाव खत्म, लेकिन राजनीति जारी
केडीएमसी में मतदान भले ही समाप्त हो चुका हो, लेकिन सत्ता की असली लड़ाई अब शुरू हुई है। पोस्ट-पोल जोड़-तोड़ और आरोप-प्रत्यारोप ने इस नगर निगम को बीएमसी से भी ज्यादा नाटकीय बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि किसके सिर सत्ता का ताज सजता है।