अटल पेंशन योजना में पेंशन बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं: वित्त राज्य मंत्री

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India News Live,Digital Desk : देश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था में जीवनयापन का आधार मानी जाने वाली अटल पेंशन योजना (एपीवाई) को लेकर लाखों निवेशकों के मन में सवाल था: क्या सरकार महंगाई को ध्यान में रखते हुए मासिक पेंशन राशि बढ़ाएगी? केंद्र सरकार ने अब संसद में इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर दी है। लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि फिलहाल इस योजना के तहत मिलने वाली गारंटीशुदा पेंशन को बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

सरकार ने पेंशन बढ़ाने से इनकार क्यों किया?

कई सब्सक्राइबर और विशेषज्ञ मांग कर रहे थे कि पेंशन को महंगाई से जोड़ा जाए या इसकी सीमा बढ़ाई जाए। हालांकि, सरकार का तर्क है कि यदि पेंशन की राशि बढ़ाई जाती है, तो सब्सक्राइबरों द्वारा दी जाने वाली मासिक किस्त भी बढ़ानी पड़ेगी। यह योजना मुख्य रूप से गरीब और कम आय वर्ग के लिए है, इसलिए मौजूदा शर्तों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया गया है ताकि उन्हें प्रीमियम का अतिरिक्त बोझ न उठाना पड़े।

अटल पेंशन योजना क्या है?

मई 2015 में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। 18 से 40 वर्ष की आयु के बीच का कोई भी नागरिक इस योजना में शामिल हो सकता है। सदस्यता लेने वाले की आयु और चुनी गई योजना के आधार पर, 60 वर्ष की आयु के बाद उन्हें ₹1,000 से ₹5,000 प्रति माह तक की निश्चित पेंशन मिलती है। इसके लिए मासिक अंशदान मात्र ₹42 से शुरू होकर ₹1,454 तक जाता है।

84.5 करोड़ से अधिक लोग शामिल हुए

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। 30 नवंबर, 2025 तक, देश भर में कुल 84 लाख से अधिक लोग इस योजना से जुड़ चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि कुल ग्राहकों में से 86.91% ने 1,000 रुपये की पेंशन योजना को चुना है, जिससे पता चलता है कि यह योजना सबसे गरीब वर्ग को सबसे अधिक आकर्षित कर रही है। वहीं, केवल 815% लोगों ने ही 5,000 रुपये की उच्चतम पेंशन योजना को चुना है।

रिकॉर्ड तोड़ पंजीकरण

वित्तीय वर्ष 2024-25 और चालू वर्ष 2025-26 में नए ग्राहकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। अकेले चालू वर्ष में ही नवंबर तक 84 लाख से अधिक नए लोग इस सुरक्षा कवर के अंतर्गत आ चुके हैं। ये आंकड़े साबित करते हैं कि लोग अब सेवानिवृत्ति के बाद की योजना के प्रति जागरूक हो गए हैं।