मुइज्जू के 'इजरायल पर हमले' वाले बयान से भड़का अमेरिका! ट्रंप के दूत को दुत्कारने पर मालदीव से मांगा गया जवाब
India News Live,Digital Desk : मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और अमेरिका के बीच कूटनीतिक दरार अब एक बड़े विवाद में बदल गई है। ईरान-इजरायल युद्ध को लेकर मुइज्जू के 'भड़काऊ' बयानों और अमेरिकी अधिकारियों के प्रति उनके अड़ियल रवैये ने वाशिंगटन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिका ने अब औपचारिक रूप से मालदीव सरकार से मुइज्जू के उन बयानों पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिनमें उन्होंने इजरायल पर 'दिन-रात हमले' करने की वकालत की थी।
क्या था मुइज्जू का वह बयान, जिससे हिल गई कूटनीति?
ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच मोहम्मद मुइज्जू ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया। MEMRI की रिपोर्ट के अनुसार, मुइज्जू ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा था, "यह जंग तुरंत रुकनी चाहिए, लेकिन अगर हमले होने ही हैं, तो ईरान को सीधे इजरायल पर हमले करने चाहिए। इजरायल पर दिन-रात हमले होने चाहिए, हम यही चाहते हैं।" राष्ट्रपति के इस बयान ने न केवल अमेरिका को नाराज किया, बल्कि मालदीव की 'तटस्थ' छवि पर भी सवालिया निशान लगा दिए।
डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत से मिलने से किया इनकार
तनाव तब और बढ़ गया जब मुइज्जू ने मार्च में मालदीव दौरे पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर से मुलाकात करने से साफ इनकार कर दिया। गोर ने मालदीव के रक्षा और विदेश मंत्रियों से तो मुलाकात की, लेकिन मुइज्जू ने मीटिंग रद्द कर दी। जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दो-टूक जवाब देते हुए कहा, "अगर वह युद्ध के बारे में बात करना चाहते हैं, तो मुझे कुछ नहीं कहना। मैं मालदीव की धरती का इस्तेमाल किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं होने दूंगा।"
अमेरिका की सख्ती: विदेश मंत्री को देना पड़ा जवाब
मुइज्जू की इस 'अकड़' पर अमेरिका ने अब संज्ञान लिया है। अमेरिकी विदेश विभाग की उप सहायक सचिव बेथनी मॉरिसन और सर्जियो गोर ने मालदीव की विदेश मंत्री इरुथिशाम एडम से तीखी चर्चा की। अमेरिकी ब्यूरो ने साफ किया कि उन्हें राष्ट्रपति के हालिया बयानों पर स्पष्ट जवाब चाहिए। दबाव बढ़ता देख मालदीव की विदेश मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति अमेरिका के साथ 'सकारात्मक संबंध' चाहते हैं और उनके बयानों को अलग संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।
मालदीव की 'दोहरी मुसीबत': कर्ज और कूटनीति
मुइज्जू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मालदीव गहरे आर्थिक संकट और चीन के कर्ज के जाल में फंसा हुआ है। एक तरफ वह भारत से 'करेंसी स्वैपिंग' और चीन से कर्ज अदायगी में मोहलत मांग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका जैसी महाशक्ति से सीधे टकरा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि मुइज्जू का यह रवैया मालदीव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग कर सकता है, जिसका सीधा असर देश की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।