June 21 2026 05:30 am

'इसे युद्ध मत कहिए, यह तो शांति का अभियान है!' ईरान को घुटनों पर लाने के दावे के बीच ट्रंप ने फिर गाए अपनी तारीफों के कसीदे

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India News Live,Digital Desk : दुनिया भर की सुर्खियों में छाए रहने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। ईरान के साथ जारी भीषण तनाव और सैन्य कार्रवाई के बीच ट्रंप ने इसे 'युद्ध' मानने से ही इनकार कर दिया है। उन्होंने इसे ईरान को परमाणु समझौते की मेज पर लाने और भविष्य के खतरों को टालने वाला एक 'सफल अभियान' करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पीठ थपथपाते हुए दावा किया कि उनकी कूटनीति और 'टैरिफ' के दबाव ने दुनिया भर में कई बड़े संघर्षों को रोका है।

'ईरान अब गिड़गिड़ा रहा है': ट्रंप का तीखा हमला

डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान की सैन्य कमर टूट चुकी है। ट्रंप ने दावा किया, "ईरान की नौसेना और थल सेना अब बहुत कमजोर हो गई है। उनकी ड्रोन फैक्ट्रियां तबाह हैं और परमाणु क्षमता धराशायी हो चुकी है। अब वे समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं।" ट्रंप ने साफ कर दिया कि जब तक तेहरान एक सख्त 'गैर-परमाणु समझौते' पर हस्ताक्षर नहीं करता, तब तक उनकी आर्थिक और सैन्य नाकेबंदी जारी रहेगी।

भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने का फिर किया दावा

अपनी तारीफों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' (2025-26) का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "मैंने टैरिफ का ऐसा दबाव बनाया कि दो परमाणु संपन्न देश पीछे हटने को मजबूर हो गए। मैंने 3 से 5 करोड़ लोगों की जान बचाई।" हालांकि, भारत ने हमेशा उनके इन दावों को खारिज किया है, लेकिन ट्रंप इसे अपनी विदेश नीति की सबसे बड़ी जीत बताते हुए कई बार 'नोबेल शांति पुरस्कार' की इच्छा भी जता चुके हैं।

होर्मुज की नाकेबंदी और तेल का संकट: ट्रंप ने ठहराया सही

ट्रंप की सख्त नाकेबंदी के चलते 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं, जिससे पूरी दुनिया और खासकर एशियाई अर्थव्यवस्थाएं कराह रही हैं। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' बंद होने से हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति रुकी हुई है। इस पर बचाव करते हुए ट्रंप ने कहा कि प्रत्यक्ष युद्ध में हजारों जानें जातीं, लेकिन यह नाकेबंदी ज्यादा प्रभावी है। उन्होंने संकेत दिए कि जरूरत पड़ने पर वे महीनों तक ईरान का दम घोंटना जारी रखेंगे।

नोबेल न मिलने पर छलका दर्द

बीते समय में शांति का नोबेल पुरस्कार न मिलने पर ट्रंप का गुस्सा भी सामने आया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों को दुनिया नजरअंदाज कर रही है, जबकि उन्होंने 8 से ज्यादा युद्धों को शांत कराया है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान पर बना यह आर्थिक दबाव उसे अंततः तेल उत्पादन पूरी तरह बंद करने और वाशिंगटन की शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर कर देगा।