अमेरिका ने ईरान पर किए ताबड़तोड़ हवाई हमले, बौखलाए ईरान ने दी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में जहाजों को उड़ाने की धमकी

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पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में शांति बहाली की तमाम कोशिशों और कूटनीतिक वार्ताओं को एक बार फिर सबसे बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो महीनों से चला आ रहा नाजुक युद्धविराम (Ceasefire) अब पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों ने बुधवार, 11 जून 2026 को ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से भीषण हवाई हमले (Airstrikes) शुरू कर दिए हैं।

इस अमेरिकी कार्रवाई के बाद पूरे ईरान में हड़कंप मच गया है। विशेषकर ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित प्रमुख सैन्य और व्यापारिक शहरों— बंदर अब्बास, सिरिक और मीनाब में भारी मिसाइल विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं। वहीं, इस हमले से बौखलाए ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को पूरी तरह ब्लॉक करने और वहां से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को बम से उड़ाने की आत्मघाती धमकी दे डाली है।

क्यों भड़का अमेरिका? जानिए ताजा विवाद की असली वजह

इस नए और भीषण सैन्य टकराव की शुरुआत सोमवार को हुई थी, जब रणनीतिक रूप से संवेदनशील स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास अमेरिकी सेना का एक अत्याधुनिक 'AH-64 अपाचे' (Apache) लड़ाकू हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था।

ड्रोन से हमले का आरोप: अमेरिकी रक्षा अधिकारियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरान पर इस हेलीकॉप्टर को मार गिराने का आरोप लगाया है। अमेरिकी पेंटागन के अनुसार, एक ईरानी सुसाइड ड्रोन ने हवा में जानबूझकर अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को टक्कर मारी थी।

पायलटों का रेस्क्यू: इस खतरनाक हमले के बावजूद, एक अत्याधुनिक अमेरिकी ड्रोन बोट की मदद से समुद्र में गिरे दोनों अमेरिकी पायलटों को चमत्कारी रूप से सुरक्षित बचा लिया गया।

'ईरान को अब इसकी भारी कीमत चुकानी होगी'— राष्ट्रपति ट्रंप

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन हमलों की आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि यह कार्रवाई ईरान की लगातार बढ़ती और अनुचित आक्रामकता को कुचलने के लिए की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एबीसी न्यूज (ABC News) से बातचीत में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान: "ईरान ने हमारे अपाचे हेलीकॉप्टर के साथ जो हिमाकत की है, उसके बाद हमारा जवाब बहुत मजबूत, क्रूर और शक्तिशाली होना ही चाहिए था। यह हवाई हमला उसी का नतीजा है। ईरान एक शांति समझौते के लिए चल रही बातचीत में जानबूझकर बहुत लंबा समय ले रहा था, जो कि खुद उनके भविष्य के लिए अच्छा हो सकता था। लेकिन अब बातचीत का वक्त खत्म हो चुका है और उन्हें इस गुस्ताखी की भारी कीमत चुकानी होगी।"

दोनों तरफ से बरसीं मिसाइलें: अमेरिकी एयरबेस भी निशाने पर

बुधवार को शुरू हुआ यह सैन्य टकराव बेहद हिंसक रूप ले चुका है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास स्थित ईरानी सेना के एयर डिफेंस सिस्टम (विमान भेदी प्रणाली), ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों और रडार प्रणालियों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है।

अमेरिकी हमलों के तुरंत बाद ईरान की कुख्यात सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी करारा पलटवार किया। ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया:

मिसाइल और सुसाइड ड्रोन अटैक: ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों (Airbases) पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और सुसाइड ड्रोन दागे।

अमेरिका का दावा: हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उनकी पैट्रियट मिसाइल प्रणालियों ने अधिकांश ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया और अमेरिकी ठिकानों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ।

'संकल्प की परीक्षा न ले अमेरिका'— ईरानी विदेश मंत्री

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका को सीधे शब्दों में ललकारते हुए युद्ध की चेतावनी दी है। उन्होंने तेहरान में कहा, "रणभूमि में अपनी लगातार हार के बावजूद अमेरिका ने हमारे संकल्प की परीक्षा लेने की बड़ी भूल की है। हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं किसी भी अमेरिकी हमले को अनुत्तरित नहीं छोड़ेंगी। अगर अमेरिकी सैनिक जिंदा और सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो वे तुरंत हमारा क्षेत्र (मिडल ईस्ट) छोड़कर भाग जाएं।"

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लॉक करने की धमकी से दुनिया में हड़कंप

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे डराने वाली बात ईरान के शीर्ष सैन्य कमांड का वह फैसला है, जिसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद करने और वहां से गुजरने वाले किसी भी देश के कमर्शियल या सैन्य जहाज को उड़ाने का आदेश जारी किया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह जलमार्ग?: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री तेल मार्ग (Maritime Oil Route) है। पूरी दुनिया में होने वाली कुल तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) का लगभग 20% हिस्सा अकेले इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है।

कच्चे तेल में उछाल की आशंका: ईरान की इस खुली धमकी के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में हड़कंप मच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है, जिससे भारत सहित पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और महंगाई का नया संकट खड़ा हो सकता है।