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September 08 2026 01:16 pm

बाहुबलियों के शस्त्र लाइसेंस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: 41 लोगों की रिपोर्ट के लिए सरकार को 'अंतिम मौका'

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India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान सामने आया कि सरकार द्वारा चिन्हित 83 बाहुबलियों में से केवल 42 के शस्त्र लाइसेंसों की जानकारी ही अदालत में जमा की गई है। इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने शेष 41 लोगों का विवरण पेश करने के लिए सरकार को तीन दिन का अंतिम मौका दिया है।

कोर्ट का सख्त रुख: समय सीमा के बाद कोई मोहलत नहीं

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने जयशंकर उर्फ बैरिस्टर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने स्वीकार किया कि गृह सचिव द्वारा दाखिल हलफनामे में केवल 42 व्यक्तियों की ही जानकारी उपलब्ध कराई गई है, जबकि बाकी 41 का डेटा अभी जुटाया जा रहा है। सरकार ने इसके लिए एक सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने इसे अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि अब कोई भी अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 29 मई को नियत की गई है।

क्या है पूरा मामला?

हाईकोर्ट ने बाहुबलियों द्वारा असलहों के सार्वजनिक प्रदर्शन और उनके दुरुपयोग पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि:

आत्मरक्षा के नाम पर हथियारों का प्रदर्शन सार्वजनिक स्थानों पर भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है।

यह 'ताकत का भ्रम' और 'प्रभुत्व' जमाने का माध्यम बन गया है, जो एक शांतिपूर्ण समाज के लिए घातक है।

किन हस्तियों पर है नजर?

कोर्ट ने जिन बाहुबलियों और प्रभावशाली व्यक्तियों के शस्त्र लाइसेंस, आपराधिक इतिहास, सही पते और सुरक्षा व्यवस्था का ब्योरा तलब किया है, उनमें रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया), धनंजय सिंह, बृजभूषण सिंह, सुशील सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहद, सुजीत सिंह बेलवा, उपेंद्र सिंह गुड्डू, पप्पू भौकाली, इंद्रदेव सिंह, सुनील यादव, बादशाह सिंह, संग्राम सिंह, सुल्लू सिंह, चुलबुल सिंह, सनी सिंह, छुन्नू सिंह और डॉ. उदयभान सिंह जैसे चर्चित नाम शामिल हैं।

सुनवाई के लिए विशेष निर्देश

अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि अगली सुनवाई के दौरान इंस्पेक्टर रैंक या उससे ऊपर का एक जिम्मेदार अधिकारी कोर्ट में मौजूद रहे। उस अधिकारी को जिलों से जुटाए गए सभी तथ्यों, आंकड़ों और शस्त्र लाइसेंसों के विवरण की पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि सुनवाई के दौरान किसी भी प्रश्न का तत्काल समाधान किया जा सके।

अब सबकी निगाहें 29 मई की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां सरकार को यह साबित करना होगा कि उसने कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह से पालन कर लिया है।