मायावती के 'किले' में अखिलेश की सेंध: बसपा के दिग्गजों के सहारे 2027 की तैयारी, 'पीडीए' को मिल रही नई संजीवनी
India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए बिसात बिछनी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने अब एक ऐसी रणनीति अपनाई है जो सीधे तौर पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के आधार को चुनौती दे रही है। अखिलेश की नई योजना बसपा के उन पुराने और अनुभवी चेहरों को 'साइकिल' पर सवार करने की है, जिन्होंने कभी कांशीराम के साथ मिलकर गांव-गांव में नीले झंडे की पैठ बनाई थी।
सपा का मानना है कि सत्ता की चाबी उस 'वोट शिफ्ट' में छिपी है, जो बसपा से छिटककर नेतृत्व की तलाश में है।
बसपा के 'पुराने इंजन' से चलेगी सपा की 'साइकिल'
अखिलेश यादव ने मायावती के उन पूर्व करीबियों को फ्रंट लाइन पर रखा है, जिनके पास दशकों का सांगठनिक अनुभव है। पिछले हफ्ते ही बसपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एमएच खान के सपा में शामिल होने से इस मुहिम को और मजबूती मिली है।
सपा में शामिल प्रमुख 'बहुजन' चेहरे:
लालजी वर्मा और रामअचल राजभर: पिछड़ों और अति-पिछड़ों के बीच कद्दावर पकड़ रखने वाले ये नेता अब सपा के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी: कभी मायावती के 'दाहिने हाथ' माने जाने वाले सिद्दीकी अब सपा के साथ अल्पसंख्यक राजनीति को धार दे रहे हैं।
इंद्रजीत सरोज, त्रिभुवन दत्त और दद्दू प्रसाद: दलित समाज और बसपा के पुराने कैडर पर मजबूत पकड़ रखने वाले ये नेता 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को वैचारिक मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
रणनीति में बदलाव: गठबंधन नहीं, सीधे विलय पर जोर
1993 और 2019 में बसपा के साथ गठबंधन के कड़वे अनुभवों से सीख लेते हुए अखिलेश यादव ने अब अपनी चाल बदल दी है।
सीधा संपर्क: अब सपा किसी दल से हाथ मिलाने के बजाय, उस दल के मजबूत आधार और नेताओं को सीधे पार्टी में शामिल कर रही है।
वैचारिक विरासत: सपा अब डॉ. बीआर अंबेडकर और कांशीराम की वैचारिक विरासत को 'पीडीए' की छतरी के नीचे लाने का दावा कर रही है।
लोकसभा चुनाव का फॉर्मूला: 2024 के परिणामों में जिस तरह दलित और अल्पसंख्यक वोट सपा की ओर शिफ्ट हुए, अखिलेश उसे 2027 तक स्थायी बनाना चाहते हैं।
भाजपा का पलटवार
सपा की इस सक्रियता पर भाजपा भी नजर बनाए हुए है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अवनीश त्यागी का कहना है कि अखिलेश यादव चाहे जितने जतन कर लें, यूपी की जनता का विश्वास योगी आदित्यनाथ और पीएम मोदी के विकास कार्यों पर कायम है। उनके अनुसार, विपक्षी खेमे की यह उठापटक 2027 में भाजपा की जीत को नहीं रोक पाएगी।