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June 28 2026 02:49 am

'ऑपरेशन सिंदूर' के शहीदों के नाम छिपाने का दावा बेबुनियाद रक्षा मंत्रालय के बाद अब सेना ने भी बताया पूरा सच

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नई दिल्ली/सैन्य ब्यूरो: सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) के दौरान शहीद हुए सैनिकों के नामों को कथित तौर पर छिपाने और उन्हें मान्यता न मिलने को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा किया जा रहा था. रक्षा मंत्रालय के कड़े स्पष्टीकरण के बाद अब भारतीय सेना (Indian Army) ने भी आधिकारिक तौर पर सामने आकर इस पूरे विवाद का खंडन किया है और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को पूरी तरह भ्रामक, तथ्यात्मक रूप से गलत और बेबुनियाद बताया है.

सेना ने स्पष्ट किया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के छह जांबाज शहीद हमारे राष्ट्रीय नायक हैं और उनके सर्वोच्च बलिदान को देश बहुत पहले ही पूरे राजकीय सम्मान के साथ स्वीकार कर चुका है.

सोशल मीडिया पर चल रही खबरें जानबूझकर गुमराह करने वाली

भारतीय सेना ने शनिवार, 27 जून 2026 को एक आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्थिति साफ की. सेना के मुताबिक, कुछ प्लेटफॉर्म्स पर यह गलत नैरेटिव चलाया जा रहा है कि इन छह बहादुर सैनिकों की शहादत को हाल ही में पहली बार मान्यता दी गई है या दबाए जाने के बाद अब जाकर इसे लोगों के सामने लाया गया है.

पिछले साल ही दी गई थी श्रद्धांजलि: सेना ने साफ किया कि देश ने इन शहीद नायकों को बहुत पहले ही नमन कर लिया था. पिछले वर्ष 11 मई को तत्कालीन सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने एक आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इन वीर जवानों को विशेष रूप से 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की थी.

वीरता पुरस्कारों से नवाजे जा चुके हैं शहीद नायक

सैन्य प्रोटोकॉल के तहत इन जांबाज सैनिकों की बहादुरी को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जा चुकी है:

स्वतंत्रता दिवस पर घोषणा: इन बहादुर सैनिकों को दिए गए वीरता पुरस्कारों की आधिकारिक जानकारी पिछले साल 14 अगस्त की प्रेस विज्ञप्ति में देश के सामने सार्वजनिक की जा चुकी है.

सेना प्रमुख द्वारा पदक वितरण: इस वर्ष जयपुर में आयोजित हुए 'सेना दिवस परेड' (Army Day Parade) के दौरान खुद थल सेना प्रमुख ने इन छह में से तीन शहीद सैनिकों के परिवारों को सेना पदक (वीरता) प्रदान किया था. वहीं, वायु सेना प्रमुख ने भी पिछले साल अक्टूबर में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में अन्य शहीदों के परिवारों को सम्मानित किया था.

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (NWM) पर नाम दर्ज करने का तय है प्रोटोकॉल

विवाद का एक मुख्य बिंदु राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम अंकित करने को लेकर भी था. इस पर सेना ने दो-टूक कहा है:

शहीदों के नाम युद्ध स्मारक पर अंकित करने की प्रक्रिया एक बेहद पवित्र, स्थापित और स्पष्ट सैन्य प्रोटोकॉल के तहत होती है.

रक्षा बल इन तय प्रक्रियाओं का पूरी सावधानी, मर्यादा और सम्मान के साथ पालन करते हैं. यह आरोप लगाना कि नियमों का पालन नहीं हुआ, पूरी तरह गलत है.

शोक संतप्त परिवारों को दुख पहुंचाने की कोशिश पर सेना ने जताई नाराजगी

भारतीय सेना ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अनावश्यक विवाद खड़ा किए जाने पर गहरा अफसोस जताया है. सेना ने कहा कि ऐसी झूठी बातें न केवल तथ्यों को तोड़ती-मरोड़ती हैं, बल्कि अपनी जान गंवाने वाले वीरों के शोक संतप्त परिवारों को बेवजह का मानसिक दुख पहुंचाती हैं. यह देश के सर्वोच्च बलिदानियों के सम्मान को कम करने जैसा है.

संयम बरतने की अपील: सेना ने मीडिया और सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे देश की सुरक्षा और शहीदों से जुड़े मामलों पर रिपोर्टिंग या बात करते समय जिम्मेदारी और संयम बरतें. भारतीय सेना देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले हर एक सैनिक का सम्मान करने के अपने संकल्प पर पूरी तरह अडिग है.