LPG के बाद अब CNG और PNG पर मंडराया संकट, कतर के 2 टैंकरों को ईरान ने रोका
India News Live,Digital Desk : देश में पहले से ही एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की किल्लत और कीमतों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन अब एक और बुरी खबर सामने आ रही है। ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण युद्ध की आंच अब भारत की रसोई और वाहनों के ईंधन तक पहुंच गई है। ताजा घटनाक्रम में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कतर के दो एलएनजी (LNG) टैंकरों को 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में रोक दिया है। इस कदम के बाद भारत में सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) की सप्लाई बाधित होने और कीमतें आसमान छूने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव: कतर के टैंकरों पर ईरान का कब्जा!
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण समुद्री मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) युद्ध के मैदान में तब्दील हो चुका है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, कतर के दो बड़े एलएनजी टैंकर— 'अल दायेन' और 'रशीदा'—जो भारत और अन्य एशियाई देशों के लिए गैस लेकर आ रहे थे, उन्हें ईरान ने रोक दिया है। जहाजों को बिना किसी स्पष्ट कारण के अपनी जगह पर रुकने का आदेश दिया गया है। बता दें कि कतर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता है और इस मार्ग के बंद होने का मतलब है कि भारत के गैस टर्मिनलों तक स्टॉक पहुंचना लगभग असंभव हो जाएगा।
भारत में क्यों बढ़ सकती हैं कीमतें? समझिए पूरा गणित
भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा विदेशों से एलएनजी के रूप में आयात करता है। इसे जहाजों के जरिए भारत लाया जाता है और फिर रिगैसीफाई करके पाइप वाली गैस (PNG) और वाहनों के लिए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) में बदला जाता है।
सप्लाई चैन टूटी: कतर ने मार्च 2026 से ही अपने निर्यात में कटौती शुरू कर दी है।
बीमा का संकट: युद्ध क्षेत्र होने के कारण जहाजों के इंश्योरेंस का प्रीमियम कई गुना बढ़ गया है, जिससे आयात लागत बढ़ गई है।
निर्यात क्षमता का नुकसान: ईरानी हमलों में कतर की 17% गैस निर्यात क्षमता पहले ही तबाह हो चुकी है, जिसकी मरम्मत में 3 से 5 साल लग सकते हैं।
सरकार का बड़ा फैसला: किसे मिलेगी प्राथमिकता और किसकी कटेगी गैस?
गहराते संकट को देखते हुए भारत सरकार ने 'नेचुरल गैस (सप्लाई रेगुलेशन) ऑर्डर, 2026' जारी किया है। इसके तहत गैस के वितरण के लिए प्राथमिकता तय की गई है:
प्राथमिकता (100% सप्लाई): घरेलू पीएनजी कनेक्शन और वाहनों के लिए सीएनजी को पहली प्राथमिकता दी गई है। सरकार का प्रयास है कि आम आदमी के चूल्हे और आवाजाही पर असर न पड़े।
कटौती का सामना (20-70% कटौती): औद्योगिक (Industrial) और कमर्शियल यूजर्स पर भारी कटौती लागू की गई है। गुजरात गैस और GSPC जैसी कंपनियों ने पहले ही इंडस्ट्रियल कस्टमर्स को गैस की आपूर्ति आधी कर दी है।
भारत के लिए क्या है उम्मीद की किरण?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के लिए एक राहत भरी बात यह है कि ईरान ने भारत को अपने 'मित्र देशों' की सूची में रखा है। इसका अर्थ है कि भारतीय झंडे वाले जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने में शायद ईरान बाधा न डाले। हालांकि, कतर से होने वाली सप्लाई में आ रही तकनीकी और युद्ध संबंधी बाधाएं अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में आम आदमी को सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में भारी उछाल के लिए तैयार रहना होगा।