इस्लामाबाद के बाद अब जिनेवा पर टिकी दुनिया की नजरें, क्या 21 अप्रैल से पहले थमेगा महायुद्ध का खतरा
India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट के बीच एक बड़ी उम्मीद की किरण नजर आ रही है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद, अब दोनों देशों के बीच कूटनीति का नया केंद्र जिनेवा (Switzerland) बनने जा रहा है। वैश्विक चिंताओं के बीच यह खबर राहत देने वाली है कि युद्ध के मुहाने पर खड़े दोनों देश एक बार फिर मेज पर बैठने को तैयार हैं।
युद्धविराम खत्म होने से पहले 'आर-पार' की कोशिश
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह हफ्तों से चल रहा तनाव 21 अप्रैल को एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच सकता है, क्योंकि इसी दिन दो सप्ताह का अस्थायी युद्धविराम समाप्त हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हफ्ते के अंत तक दोनों देशों के प्रतिनिधि जिनेवा में मिल सकते हैं। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि 21 अप्रैल से पहले कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप का संकेत: 'ईरान समझौता करना चाहता है'
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक महत्वपूर्ण पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि इस्लामाबाद में बातचीत विफल होने के बावजूद ईरान ने फिर से अमेरिका से संपर्क साधा है। ट्रंप के अनुसार, आर्थिक दबाव और नाकाबंदी के चलते ईरान अब बातचीत के लिए उत्सुक है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि उन्हें लगा कि ईरान उनकी शर्तें मानने को तैयार है, तो वे आमने-सामने की बातचीत (Face-to-Face Talks) के लिए तुरंत राजी हो जाएंगे।
परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा रोड़ा
शांति वार्ता की राह में सबसे बड़ी बाधा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। ट्रंप ने अपने ताज़ा बयान में साफ कर दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की मुख्य जड़ तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं हैं। उन्होंने कड़े लहजे में कहा, "अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति कभी नहीं देगा।" जिनेवा वार्ता में भी मुख्य फोकस इसी बात पर रहने वाला है कि क्या ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने की अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करेगा।
जिनेवा ही क्यों? समझिए इस स्थान का महत्व
स्विट्जरलैंड का जिनेवा शहर ऐतिहासिक रूप से अंतरराष्ट्रीय विवादों को सुलझाने का प्रमुख केंद्र रहा है। तटस्थ स्थान होने के कारण यहां दोनों देशों के लिए बातचीत करना आसान होता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस बैठक में वही उच्च स्तरीय टीम (जैसे जेडी वैंस और जेरेड कुशनर) शामिल होगी या नए चेहरों को मौका दिया जाएगा। दुनिया भर के बाज़ार और खाड़ी देश इस बैठक के नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इसी पर कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक स्थिरता निर्भर है।