होर्मुज के बाद ट्रंप की नजर 'स्ट्रेट ऑफ मलक्का' पर: अमेरिका-इंडोनेशिया डील ने बढ़ाई चीन की धड़कन

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India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में होर्मुज की घेराबंदी के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ मलक्का' (Strait of Malacca) की ओर रुख किया है। अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच हुए हालिया रक्षा समझौते ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) की भू-राजनीति में हलचल मचा दी है। यह कदम सीधे तौर पर चीन की 'मलक्का दुविधा' (Malacca Dilemma) को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।

अमेरिका-इंडोनेशिया रक्षा समझौता: क्या है असली खेल?

इस सप्ताह अमेरिका और इंडोनेशिया ने एक बड़े रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत:

हवाई क्षेत्र तक पहुंच: अमेरिकी सैन्य विमानों को अब इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र (Airspace) में उड़ान भरने की अनुमति होगी।

सीधी निगरानी: यह समझौता अमेरिका को मलक्का जलडमरूमध्य पर चौबीसों घंटे सैन्य निगरानी और त्वरित पहुंच प्रदान करता है।

रणनीतिक घेराबंदी: होर्मुज में ईरान को घेरने के बाद, ट्रंप अब हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ने वाले इस प्रवेश द्वार को नियंत्रित करने की तैयारी में हैं।

क्यों है मलक्का का महत्व होर्मुज से भी ज्यादा?

विशेषज्ञों का मानना है कि मलक्का की रणनीतिक अहमियत होर्मुज से कहीं व्यापक है:

व्यापार का केंद्र: होर्मुज मुख्य रूप से तेल (Energy) के लिए जाना जाता है, जबकि मलक्का से ऊर्जा के साथ-साथ ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक पुर्जे और आवश्यक वस्तुओं का विशाल व्यापार होता है।

चीन की 'दुखती रग': चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों (तेल आयात) का लगभग 80% हिस्सा इसी मार्ग से पूरा करता है। यदि मलक्का ब्लॉक होता है, तो चीन की अर्थव्यवस्था कुछ ही हफ्तों में ठप हो सकती है।

अर्थव्यवस्था की रीढ़: यह जलमार्ग सिंगापुर, मलेशिया और इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्थाओं के लिए ऑक्सीजन का काम करता है।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने? (The India Factor)

स्ट्रेट ऑफ मलक्का में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक अवसर लेकर आई है:

अंडमान-निकोबार की ताकत: भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह मलक्का के पश्चिमी मुहाने पर एक 'अचल विमानवाहक पोत' (Unsinkable Aircraft Carrier) की तरह स्थित है।

निगरानी चौकी: कैंपबेल बे में स्थित भारत का सबसे दक्षिणी वायु सेना स्टेशन इस पूरे समुद्री यातायात पर नजर रखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।

नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर: अमेरिका की उपस्थिति से भारत को इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिलेगी। यह भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और नौसैनिक विस्तार के लिए अनुकूल है।

चुनौतियां और क्षेत्रीय संवेदनशीलता

हालांकि, यह रास्ता इतना आसान भी नहीं है। इंडोनेशिया और मलेशिया अपनी संप्रभुता (Sovereignty) को लेकर काफी सख्त हैं और वे नहीं चाहेंगे कि उनका क्षेत्र महाशक्तियों के युद्ध का अखाड़ा बने। वहीं, सिंगापुर की पूरी अर्थव्यवस्था शांतिपूर्ण समुद्री यातायात पर टिकी है, जो किसी भी सैन्य तनाव से चरमरा सकती है।