एक व्रत जो दिलाए 24 एकादशी का पुण्य! जानें निर्जला एकादशी के खास नियम, कहीं चूक न जाए कोई बात!
ज्योंतिष के हिसाब से हर एकादशी का अपना महत्व होता है, लेकिन एक ऐसी एकादशी है जिसे सबसे कठिन और साथ ही सबसे ज़्यादा फलदायी माना जाता है – वो है निर्जला एकादशी। जी हाँ, इस एक व्रत को रखने से आपको सालभर की 24 एकादशियों का पुण्य मिल जाता है! यह ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है, और इसका नाम ही बताता है – ‘निर्जला’ यानी बिना जल के। यानी, आपको इस दिन पानी की एक बूँद भी ग्रहण नहीं करनी होती है।
आखिर क्यों है ये इतनी खास और क्यों कहा जाता है इसे भीमसेनी एकादशी?
पौराणिक कथाओं की मानें तो इस व्रत का महत्व स्वयं महाभारत काल में भीमसेन ने जाना था। कहा जाता है कि भीम बहुत पेटू थे और बाकी सारी एकादशी का व्रत उनके लिए पानी और भोजन के बिना रख पाना असंभव था। वे परेशान थे कि ऐसे में उन्हें पुण्य कैसे मिलेगा। तब महर्षि वेदव्यास जी ने उन्हें निर्जला एकादशी व्रत के बारे में बताया था। व्यास जी ने कहा कि जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा और नियम से इस एक व्रत को रख लेता है, उसे सभी 24 एकादशियों के व्रत का फल मिलता है। और इसी दिन से यह व्रत ‘भीमसेनी एकादशी’ के नाम से भी जाना जाने लगा।
अगर आप भी रखना चाहते हैं यह परम फलदायी व्रत, तो इसके कड़े नियमों को जानना बेहद ज़रूरी है, ताकि व्रत में कोई कमी न रह जाए और आपको पूरा फल मिल सके:
कहते हैं कि जो भक्त निर्जला एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा और नियम से रखता है, उसके सभी पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। जीवन में सुख-समृद्धि आती है और सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
तो अगर आप भी इस साल निर्जला एकादशी का पुण्य पाना चाहते हैं, तो इन नियमों का ध्यान ज़रूर रखें और प्रभु विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करें!