लता मंगेशकर ने छोड़ दिया था ये गाना, आशा भोसले ने अपनी आवाज से बना दिया अमर; फीस भी ली 5 गुना ज्यादा, क्या आपने सुना?
हिंदी सिनेमा के इतिहास में पार्श्व गायन की दुनिया में लता मंगेशकर और आशा भोसले का नाम शिखर पर है। यह किस्सा है फिल्म 'तीसरी मंजिल' (1966) के उस सुपरहिट गाने 'आजा आजा मैं हूँ प्यार तेरा' का। संगीतकार आर.डी. बर्मन इस गाने के लिए बिल्कुल अलग और ऊर्जावान आवाज चाहते थे। कहा जाता है कि जब यह गाना लता मंगेशकर को सुनाया गया, तो उन्हें यह गाना उनकी गायकी की शैली से थोड़ा अलग और चुनौतीपूर्ण लगा, जिसके चलते उन्होंने इसे गाने में रुचि नहीं दिखाई।
फीस में की बंपर बढ़ोतरी और रच दिया इतिहास
आर.डी. बर्मन इस गाने के लिए आशा भोसले को लेने का मन बना चुके थे। आशा ताई ने इस मौके को भुनाया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए उन्होंने निर्माता-निर्देशक के सामने एक बड़ी शर्त रखी। उन्होंने उस दौर की अपनी सामान्य फीस से 5 गुना ज्यादा राशि की मांग की। उस समय के हिसाब से यह एक बहुत बड़ी रकम थी, लेकिन गाने की धुन और आशा भोसले के आत्मविश्वास को देखते हुए फिल्म मेकर्स मान गए।
आज भी लोगों की जुबां पर है 'आजा आजा'
आशा भोसले ने जब स्टूडियो में इस गाने को अपनी आवाज दी, तो उन्होंने इसे एक ऐसा जादुई स्पर्श दिया कि यह गाना रिलीज होते ही चार्टबस्टर बन गया। मोहम्मद रफी के साथ उनकी जुगलबंदी और उस गाने के अनूठे रिदम ने 'आजा आजा मैं हूँ प्यार तेरा' को अमर कर दिया। आशा ताई की मेहनत और उनका बेबाक अंदाज ही था कि उन्होंने उस गाने के जरिए न केवल अपनी फीस वसूल की, बल्कि साबित कर दिया कि वे किसी भी तरह के चुनौतीपूर्ण गाने को अपनी आवाज से अमर बनाने का हुनर रखती हैं।