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October 04 2026 05:33 pm

सीएम योगी का 4.60 लाख छात्रों को बड़ा तोहफा: खातों में ट्रांसफर किए ₹148 करोड़

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उत्तर प्रदेश के होनहार विद्यार्थियों के लिए शनिवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति वितरण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से एक सिंगल क्लिक में 4,60,559 छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में 148 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर कर दी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि उत्तर प्रदेश का कोई भी मेधावी छात्र धन के अभाव में अपनी शिक्षा अधूरी न छोड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्यतः यह छात्रवृत्ति 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर भेजी जाती थी, लेकिन बैंक अवकाश होने के चलते इसे 3 अक्टूबर को सीधे छात्रों के खातों में निर्बाध रूप से अंतरित किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे केवल शुरुआत बताते हुए घोषणा की कि इस शैक्षणिक सत्र में प्रदेश के 70 लाख विद्यार्थियों तक छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है।

किस वर्ग के कितने छात्र हुए लाभान्वित: आंकड़ेवार पूरा ब्योरा

योगी सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण में सामाजिक संतुलन और पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा है। इस चरण में उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, माध्यमिक और अल्पसंख्यक संस्थानों में पढ़ने वाले विभिन्न वर्गों के छात्रों को शामिल किया गया है:

अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): सबसे अधिक लाभ पिछड़ा वर्ग के छात्रों को मिला है, जहां 2,23,615 छात्र-छात्राओं के खातों में ₹60.01 करोड़ की राशि भेजी गई।

अनुसूचित जाति (SC): इस वर्ग के 1,59,959 विद्यार्थियों को ₹64.54 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति जारी की गई।

सामान्य वर्ग (General): सामान्य श्रेणी के अल्प-आय वर्ग से आने वाले 38,084 छात्र-छात्राओं को ₹11.43 करोड़ का भुगतान किया गया।

अल्पसंख्यक वर्ग (Minority): अल्पसंख्यक समुदाय के 38,901 मेधावियों के खातों में ₹12.06 करोड़ की सहायता राशि ट्रांसफर की गई।

2017 से पहले की व्यवस्था पर सीएम का प्रहार: 'दलालों और कट-कमीशन का खात्मा'

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले छात्रवृत्ति वितरण व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां थीं और छात्रों के हक का पैसा बिचौलियों व भ्रष्टाचारियों की जेब में चला जाता था। कई बार छात्रवृत्ति स्वीकृत होने के बाद भी बाबू कमीशन काटकर राशि देते थे, जिससे गरीब छात्र परेशान रहते थे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 से पहले पूरे प्रदेश में छात्रवृत्ति मद में महज 2900 करोड़ रुपये का बजट खर्च होता था, जबकि वर्तमान सरकार में इस बजट को दोगुने से अधिक बढ़ाकर 6200 करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचा दिया गया है। अब छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली को नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन (NPCI), आधार प्रमाणीकरण और पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से जोड़कर पूरी तरह ऑटोमेटेड बना दिया गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका शून्य हो गई है।

26 जनवरी तक सभी पात्र छात्रों को छात्रवृत्ति देने का सख्त अल्टीमेटम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण और तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि किसी भी पात्र छात्र का फॉर्म अनावश्यक तकनीकी आपत्तियों के कारण लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन छात्रों के आवेदनों में पिछले वर्ष तकनीकी विसंगतियां थीं, उनका भी निस्तारण कर हर हाल में 26 जनवरी तक सभी पात्र विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप जारी कर दी जाए।

सीएम ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे इस आर्थिक सहायता का उपयोग किताबों, संदर्भ ग्रंथों और अध्ययन सामग्री जुटाने में करें। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश आज बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकलकर देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और ग्रोथ इंजन बन चुका है। 'नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा' का नारा देते हुए सीएम ने कहा कि आज बेटियों की सुरक्षा, युवाओं के लिए रोजगार और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से प्रदेश के युवाओं के सामने पहचान का कोई संकट नहीं है।