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October 04 2026 09:54 pm

2029 की कहानी होगी अलग! इंडिया गठबंधन की बैठक के दो दिन बाद ही मुंगेरी लाल वाले सपने क्यों देखने लगा विपक्ष?

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राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों (INDIA Alliance) के लगभग 20-25 दलों की साझा बैठक खत्म हुए अभी दो ही दिन बीते थे कि कांग्रेस और विपक्षी खेमे से 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर बड़े दावे सामने आने लगे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने एक बयान में कहा कि पहले ऐसा लग रहा था कि गठबंधन के दल अलग-अलग दिशाओं में जा रहे हैं, लेकिन बैठक में सभी का एक मंच पर आना उल्लेखनीय कदम है। उन्होंने दावा किया कि यदि सभी दल बिना निजी स्वार्थ के ईमानदारी से योगदान दें, तो 2029 की कहानी कुछ और ही होगी।

हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जिस गठबंधन के भीतर सीट शेयरिंग और नेतृत्व को लेकर रोज सिरफुटौव्वल मची रहती है, वह बैठक के तुरंत बाद 2029 को लेकर 'मुंगेरी लाल के हसीन सपने' क्यों देखने लगा है?

विपक्ष को क्यों दिख रही है 2029 में उम्मीद? 4 मुख्य आधार

विपक्षी रणनीतिकारों का मानना है कि आने वाले समय में देश का राजनीतिक माहौल सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ जा सकता है। विपक्ष की इस उम्मीद के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारक हैं:

12-15 वर्षों की एंटी-इंकंबेंसी: केंद्र की एनडीए सरकार के लंबे कार्यकाल के बाद स्वाभाविक रूप से पैदा होने वाले सत्ता विरोधी माहौल (Anti-Incumbency) का लाभ मिलने की उम्मीद।

युवाओं और 'जेन-जी' में असंतोष: विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में देरी और बेरोजगारी को लेकर युवाओं के बीच उपजे गुस्से को विपक्ष अपने पाले में एकजुट करने की कोशिश में है।

महंगाई और मध्यम वर्ग का दबाव: खाद्यान्न, तेल, एलपीजी और जरूरी दैनिक वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण मध्यम वर्ग और महिलाओं के बड़े तबके की नाराजगी को विपक्ष बड़ा हथियार मान रहा है।

वोटर लिस्ट और संस्थागत मुद्दे: मतदाता सूचियों (SIR) से कथित रूप से लाखों नाम काटे जाने और चुनावी निष्पक्षता को लेकर विपक्ष सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने और साझा जनआंदोलन खड़ा करने की तैयारी कर रहा है।

राह में कांटे: बैठक के भीतर ही उजागर हो गई थी अंदरूनी दरार

विपक्ष 2029 की जीत के चाहे जितने भी दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि गठबंधन की जमीन अब भी बेहद कमजोर और अंतर्विरोधों से भरी है। जिस बैठक के बूते यह उम्मीद बांधी जा रही है, उसी बैठक में गहरे मतभेद सामने आ चुके थे:

उद्धव ठाकरे की दो टूक: शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्यों में कांग्रेस की 'एकला चलो' और क्षेत्रीय दलों को नजरअंदाज करने की नीति पर तीखे सवाल खड़े किए।

अखिलेश यादव की दूरी: उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस अहम बैठक से दूरी बनाए रखी, जिससे गठबंधन में दरार साफ नजर आई।

ममता बनर्जी का राहुल के नाम से परहेज: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2029 के लिए राहुल गांधी को संभावित प्रधानमंत्री चेहरे के रूप में पेश करने के सवाल को सिरे से टाल दिया।

नेतृत्व और चेहरे का संकट बरकरार

सत्तारूढ़ भाजपा के मजबूत कैडर और स्पष्ट नेतृत्व के सामने इंडिया गठबंधन अब तक न तो 2029 के लिए कोई सर्वमान्य 'चेहरा' तय कर पाया है और न ही राज्यों में सीटों के तालमेल का कोई ठोस फॉर्मूला दे पाया है। जब तक क्षेत्रीय दल कांग्रेस के बड़े भाई वाले रवैये पर सहमत नहीं होते और कांग्रेस राज्यों में अपने सहयोगी दलों के लिए जमीन नहीं छोड़ती, तब तक 2029 में सत्ता परिवर्तन का यह दावा केवल राजनीतिक बयानबाजी और 'मुंगेरी लाल के सपने' जैसा ही नजर आता है।

दूरदर्शन के जिस व्यंग्यात्मक टीवी धारावाहिक ने 'दिन में ख्वाब देखने' की आदत को भारत के आम जनमानस में 'मुंगेरी लाल के हसीन सपने' मुहावरा बना दिया था, उसका शुरुआती नॉस्टैल्जिक दौर आप मुंगेरीलाल के हसीन सपने दूरदर्शन धारावाहिक के इस पुराने टाइटल ट्रैक वीडियो में देख सकते हैं।

यह वीडियो इसलिए प्रासंगिक है क्योंकि यह उसी 90 के दशक के मशहूर शो का आधिकारिक शुरुआती एपिसोड और गीत है, जिसके शीर्षक से प्रेरित होकर भारतीय राजनीति में असंभव खयाली पुलावों पर तंज कसा जाता है।