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October 04 2026 10:46 pm

'मैंने ठान लिया था कि लोगों को मरने नहीं दूंगा': पीएम मोदी से बोले कैप्टन स्मित मच्छार

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अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों और जिंदगी व मौत के बीच झूलते संकट के दौरान अदम्य साहस का परिचय देने वाले कैप्टन स्मित मच्छार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस भावुक और प्रेरणादायी बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने संकट के उन भयावह पलों को याद करते हुए प्रधानमंत्री से कहा—"परिस्थितियां चाहे जैसी भी थीं, मैंने अपने मन में ठान लिया था कि चाहे जो हो जाए, मैं लोगों को मरने नहीं दूंगा।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके इस अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और संकट के समय त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की दिल खोलकर सराहना की। पीएम ने कहा कि जब किसी पेशेवर के दिल में सेवा और जान बचाने का ऐसा अटूट जज्बा होता है, तो सबसे कठिन चुनौतियां भी हौसले के आगे घुटने टेक देती हैं।

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कैप्टन स्मित मच्छार ने उस दिन के घटनाक्रम का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि किस तरह अचानक आए व्यवधान और अनियंत्रित हालात ने सभी को चौंका दिया था। चारों तरफ घबराहट और अनिश्चितता का माहौल था, लेकिन उन्होंने एक पल के लिए भी अपना मानसिक संतुलन नहीं खोया।

तत्काल फैसला और सूझबूझ: कैप्टन ने बताया कि सामान्य प्रोटोकॉल काम नहीं कर रहे थे और हर एक सेकंड कीमती था। ऐसे में उन्होंने अपनी टीम का हौसला बढ़ाया और सबसे पहले यात्रियों/सहकर्मियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

संकट में संयम: घबराहट के बीच लोगों को ढांढस बंधाना और सही तकनीकी निर्णय लेना सबसे बड़ी चुनौती थी। कैप्टन ने खुद को शांत रखते हुए पूरी स्थिति को नियंत्रित किया और अंततः सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

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प्रधानमंत्री ने कैप्टन स्मित मच्छार के समर्पण को न केवल एक प्रेरणादायी मिसाल बताया, बल्कि यह भी कहा कि भारत के युवा जब कर्तव्य पथ पर इस तरह की जांबाजी दिखाते हैं, तो पूरे राष्ट्र का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।

मुलाकात के दौरान पीएम ने उनके परिवार और उनकी ट्रेनिंग को भी श्रेय दिया, जिसने उन्हें इतने बड़े दबाव में अडिग रहने की ताकत दी। कैप्टन स्मित की यह कहानी आज देश भर के युवाओं और सेवा क्षेत्र से जुड़े प्रोफेशनल्स के लिए कर्तव्य और मानवीय निष्ठा की एक मिसाल बन गई है।