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November 06 2026 01:48 am

यूपी चुनाव से पहले किसानों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा: 6% ब्याज पर ₹6 लाख तक का लोन

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उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं को साधने के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार को लखनऊ में आयोजित कैबिनेट बैठक में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना' के संशोधित प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत प्रदेश के लघु एवं सीमांत किसानों को खेती-किसानी, आधुनिक कृषि उपकरणों, सिंचाई और पशुपालन जैसे कृषि विकास कार्यों के लिए 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालीन ऋण (Long Term Loan) महज 6 प्रतिशत की रियायती वार्षिक ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।

अब तक उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक (LDB) के माध्यम से किसानों को मिलने वाले इस तरह के कृषि कर्जों पर 11 से 11.5 प्रतिशत तक का भारी-भरकम ब्याज चुकाना पड़ता था। ब्याज दर अधिक होने के कारण छोटे किसान या तो कर्ज के भारी बोझ तले दब जाते थे या फिर उन्हें स्थानीय साहूकारों के पास ऊंची दरों पर भटकना पड़ता था। योगी कैबिनेट द्वारा ब्याज दर घटाकर सीधे 6 फीसदी किए जाने के बाद अब बाकी के करीब 5 से 5.5 फीसदी ब्याज का वहन राज्य सरकार स्वयं सब्सिडी के रूप में करेगी।

92 फीसदी छोटे व सीमांत किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

उत्तर प्रदेश में लगभग 2.86 करोड़ किसान पंजीकृत हैं। कृषि विभाग और राजस्व आंकड़ों के अनुसार, इनमें से करीब 78 प्रतिशत सीमांत किसान (जिनके पास एक हेक्टेयर से कम कृषि भूमि है) और लगभग 14 प्रतिशत छोटे किसान (एक से दो हेक्टेयर भूमि वाले) हैं। यानी राज्य के कुल किसानों में 92 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी इन्हीं छोटे काश्तकारों की है।

कैबिनेट के इस फैसले का सीधा और सबसे बड़ा फायदा इन्हीं 92 फीसदी किसानों को मिलेगा। कम ब्याज दर पर पूंजी मिलने से छोटे किसान आधुनिक खेती की तरफ बढ़ सकेंगे, अपनी उपज की प्रोसेसिंग कर सकेंगे और फसल चक्र के दौरान बीज, खाद व कीटनाशकों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहेंगे।

किन-किन कृषि कार्यों के लिए मिलेगा यह सस्ता लोन?

'मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना' केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बहुआयामी रफ्तार देने के लिए डिजाइन किया गया है। किसान इस 6% ब्याज वाले ऋण का इस्तेमाल निम्नलिखित क्षेत्रों में कर सकेंगे:

लघु सिंचाई परियोजनाएं: बोरवेल, सबमर्सिबल पंप, ड्रिप व स्प्रिंकलर इरिगेशन सिस्टम लगाने के लिए।

कृषि यंत्रीकरण: पावर टिलर, रोटावेटर, थ्रेशर, हार्वेस्टर और मिनी ट्रैक्टर की खरीद के लिए।

डेयरी एवं पशुपालन: दुधारू पशुओं (गाय-भैंस) की खरीद, आधुनिक पशु शेड और मिल्किंग मशीन लगाने के लिए।

बागवानी एवं पॉलीहाउस: फल, सब्जी, औषधीय पौधों की खेती और ग्रीनहाउस फार्मिंग के लिए।

मत्स्य पालन एवं मधुमक्खी पालन: मछली के तालाब खोदने, फीड मैनेजमेंट और बी-कीपिंग बॉक्स लगाने के लिए।

यह कर्ज किसानों को 3 से 15 वर्षों की लंबी अवधि के लिए दिया जाएगा, जिससे उन पर तत्काल किस्त चुकाने का मानसिक दबाव नहीं रहेगा।

कैसे मिलेगा लोन और किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?

सहकारिता विभाग के अंतर्गत आने वाले उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक (UPSGVB / LDB) की जिला और तहसील स्तरीय शाखाओं के माध्यम से यह ऋण वितरित किया जाएगा।

आवेदन की सरल प्रक्रिया और जरूरी कागजात:

पात्रता: आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए और उसके पास लघु या सीमांत कृषक का वैध प्रमाण पत्र होना चाहिए।

किसान रजिस्ट्री / फार्मर आईडी: लोन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए किसान का फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है।

जरूरी दस्तावेज: वर्तमान फसल वर्ष की खसरा-खतौनी, किसान बही, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, पासपोर्ट साइज फोटो और दो स्थानीय गवाहों के हस्ताक्षर।

आवेदन व सत्यापन: सहकारी बैंक की नजदीकी शाखा से फॉर्म भरकर जमा करने के बाद बैंक अधिकारियों द्वारा भूमि का भौतिक सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद ऋण स्वीकृति पत्र (LSO) जारी होगा।

2027 चुनाव से पहले ग्रामीण वोटबैंक पर बड़ा दांव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में किसान सबसे निर्णायक मतदाता वर्ग हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों से सबक लेते हुए योगी सरकार अब ग्रामीण और कृषक अर्थव्यवस्था को पूरी तरह अपने पाले में मजबूत करने में जुट गई है।

हाल ही में जहां निजी नलकूपों (ट्यूबवेल) के लिए मुफ्त बिजली का वादा पूरा किया गया, वहीं अब 6 फीसदी ब्याज पर 6 लाख तक का लोन देकर सरकार ने ग्रामीण असंतोष को दूर करने की दिशा में बड़ा दांव चला है। विपक्ष जहां लगातार एमएसपी गारंटी और खाद-बीज की महंगाई को लेकर सरकार पर हमलावर है, वहीं कैबिनेट से इस प्रस्ताव के पास होने के बाद भाजपा को चुनावी मैदान में किसानों के बीच अपनी उपलब्धियां गिनाने का एक मजबूत हथियार मिल गया है।