क्या टल जाएगा मिडिल ईस्ट का महायुद्ध? अमेरिका-ईरान के बीच फाइनल डील की आहट, पाकिस्तान की बड़ी भूमिका
India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट के दहकते हुए रणक्षेत्र से एक सुकून देने वाली खबर सामने आ रही है। लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अमेरिका और ईरान अब एक ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब पहुंच गए हैं। अंतरराष्ट्रीय गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम का 'फाइनल ड्राफ्ट' तैयार हो चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जो वैश्विक शांति की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या तेहरान जाएंगे आसिम मुनीर?
मीडिया रिपोर्ट्स और राजनयिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का तेहरान दौरा कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर रहा है। कहा जा रहा है कि मुनीर तेहरान पहुंचकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुए 'अंतिम समझौते' की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। हालांकि दोनों देशों की ओर से अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन पाकिस्तान की यह सक्रियता यह दर्शाती है कि पर्दे के पीछे से शांति के ठोस प्रयास चल रहे हैं। हज के बाद इस्लामाबाद में वार्ता का अगला दौर भी तय माना जा रहा है।
क्या होंगे समझौते के मुख्य बिंदु?
इस प्रस्तावित शांति समझौते में मिडिल ईस्ट की सुरक्षा से जुड़े कई बड़े मुद्दे शामिल हैं। चर्चा है कि इसमें होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने, ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने और समुद्री सुरक्षा की गारंटी देने जैसे अहम विषय प्रमुखता से रखे गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि खाड़ी देशों के नेताओं की अपील पर उन्होंने सैन्य हमलों को रोककर कूटनीति को प्राथमिकता दी है। दूसरी ओर, ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है, जिसमें जमे हुए विदेशी फंड की रिहाई और नौसैनिक नाकाबंदी का खात्मा शामिल है।
तनाव और चेतावनी का दौर जारी
राहत की खबरों के बीच बयानबाजी का दौर भी कम नहीं हुआ है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि शांति समझौता सिरे नहीं चढ़ा, तो ईरान हर तरह की जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने प्रगति की सराहना करते हुए यह भी साफ कर दिया है कि अमेरिकी सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। अप्रैल से लागू नाजुक युद्धविराम के बाद, दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कूटनीतिक कोशिश मिडिल ईस्ट को एक विनाशकारी युद्ध से बचा पाएगी या नहीं।