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July 11 2026 11:42 pm

जितिन प्रसाद के इस्तीफे से 2 साल से खाली MLC सीट पर क्यों नहीं हुआ फैसला

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उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इस समय भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक खास रणनीति को लेकर जबरदस्त सस्पेंस बना हुआ है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद द्वारा खाली की गई विधान परिषद (MLC) की एक सीट पिछले दो साल से अधिक समय से लगातार रिक्त चल रही है। जून 2024 में लोकसभा चुनाव जीतने के बाद जितिन प्रसाद ने इस पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद विधान परिषद के कार्यकारी सभापति ने 10 जून 2024 को इस सीट को आधिकारिक रूप से रिक्त घोषित किया था। तब से लेकर आज यानी जुलाई 2026 तक दो साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन इस महत्वपूर्ण सीट को भरने के लिए बीजेपी आलाकमान ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इस लंबी खामोशी को लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार बेहद गर्म है।

मंत्रिमंडल विस्तार की थ्योरी रही बेअसर: टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त में अभी तक किसी का नाम नहीं

शुरुआती दौर में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषकों का यह दृढ़ अनुमान था कि बीजेपी ने इस एमएलसी सीट को जानबूझकर सुरक्षित रख छोड़ा है। माना जा रहा था कि आगामी कैबिनेट विस्तार में किसी ऐसे कद्दावर नेता को मंत्री बनाया जा सकता है जो वर्तमान में राज्य विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य न हो, और उसे बाद में इस सीट से सदन भेजा जाएगा। हालांकि, उत्तर प्रदेश में हुए हालिया मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भी इस खाली सीट को लेकर पार्टी के भीतर कोई बड़ी सुगबुगाहट देखने को नहीं मिली। कांग्रेस का दामन छोड़ बीजेपी में शामिल हुए जितिन प्रसाद को पार्टी ने 2021 में एमएलसी बनाकर लोक निर्माण विभाग (PWD) जैसा भारी-भरकम मंत्रालय सौंपा था। बाद में 2024 के आम चुनाव में उन्हें पीलीभीत से लोकसभा का टिकट दिया गया और उनकी जीत के बाद उन्हें केंद्र सरकार में राज्यमंत्री का दायित्व सौंपा गया, जिसके बाद से ही यूपी की यह सीट खाली चल रही है।

सोशल इंजीनियरिंग पर बीजेपी का फोकस: क्या किसी ब्राह्मण चेहरे की खुलेगी लॉटरी?

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों और विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो बीजेपी इस खाली सीट के जरिए आगामी चुनावों से पहले एक बड़ा सामाजिक समीकरण (Social Engineering) साधने की तैयारी में है। संघ और संगठन के भीतर चल रही चर्चाओं के अनुसार, जितिन प्रसाद के विकल्प के तौर पर पार्टी किसी बेहद मजबूत और बेदाग छवि वाले ब्राह्मण चेहरे को विधान परिषद भेज सकती है ताकि पूर्वांचल और मध्य यूपी के सवर्ण मतदाताओं के बीच एक सकारात्मक संदेश दिया जा सके। हालांकि, इस सीट के लिए लखनऊ कार्यालय से लेकर दिल्ली के चाणक्यपुरी तक दावेदारों की एक लंबी-चौड़ी फेहरिस्त दौड़ लगा रही है। अंतिम निर्णय पर अंतिम मुहर दिल्ली केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह की रजामंदी के बाद ही लगेगी।

यूपी की तीन अन्य विधानसभा सीटें भी चल रही हैं खाली: आम चुनावों के साथ हो सकते हैं उपचुनाव

जितिन प्रसाद की इस एमएलसी सीट के अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश में तीन महत्वपूर्ण विधानसभा सीटें भी पिछले काफी समय से खाली पड़ी हुई हैं। इनमें मऊ जिले की घोसी, सोनभद्र की दुद्धी और बरेली की फरीदपुर विधानसभा सीट शामिल हैं। इन तीनों निर्वाचन क्षेत्रों में संबंधित विधायकों के असामयिक निधन के चलते यह प्रशासनिक शून्यता पैदा हुई है। निर्वाचन आयोग और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब समय की कमी को देखते हुए इन तीनों रिक्त विधानसभा सीटों पर उपचुनाव अलग से न कराकर, उन्हें राज्य में होने वाले आगामी मुख्य विधानसभा चुनावों के साथ ही संपन्न कराया जा सकता है।

बीजेपी प्रदेश मुख्यालय पर आज महा-बैठक: चुनावी चक्रव्यूह और संगठनात्मक बदलावों पर होगी चर्चा

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच आज शनिवार को लखनऊ स्थित बीजेपी के प्रांतीय मुख्यालय पर एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन संगठनात्मक बैठक आयोजित की जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और सभी मोर्चों के प्रभारियों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया गया है। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देना, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और इस लंबे समय से लटकी हुई एमएलसी सीट के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों के पैनल पर गुप्त विचार-विमर्श करना है। आज की इस बैठक के निष्कर्ष यूपी की भावी राजनीति की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।