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July 18 2026 09:13 pm

केदारनाथ से लेकर उत्तरकाशी तक... हर चेतावनी के बाद भी 'चेतावनी प्रणाली' क्यों गायब

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India News Live,Digital Desk : 12 साल पहले केदारनाथ में जो भयानक त्रासदी आई थी, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। हजारों लोगों की जान चली गई थी, और तब से बार-बार कहा गया कि अब ऐसी घटनाओं से पहले चेतावनी देने वाली प्रणाली बनाई जाएगी। लेकिन आज भी उत्तराखंड में अर्ली वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) का सपना अधूरा ही है।

हर साल उत्तराखंड में कहीं न कहीं बाढ़, भूस्खलन या बादल फटने की घटनाएं होती हैं, जिससे न सिर्फ आम लोगों की जान जाती है, बल्कि बड़ी संपत्ति का भी नुकसान होता है। बावजूद इसके, ऐसी कोई ठोस तकनीकी व्यवस्था अब तक नहीं बन सकी जो समय रहते लोगों को अलर्ट कर सके।

राज्य सरकारों ने अब तक सिर्फ बैठकें की हैं, अध्ययन दल भेजे हैं और घोषणाएं की हैं। कुछ समय पहले ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्यों का दौरा कर एक टीम ने वहां की अर्ली वार्निंग व्यवस्था को समझने की कोशिश भी की, लेकिन बात सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई।

2021 में चमोली ज़िले के रैणी में जब आपदा आई, तो फिर से चेतावनी प्रणाली को लेकर चर्चाएं शुरू हुईं। अब हाल ही में उत्तरकाशी के धराली में जो आपदा आई, उसने फिर से उसी पुराने सवाल को ज़िंदा कर दिया है—आख़िर सरकार कब तक सिर्फ वादे करती रहेगी?

लोगों को उम्मीद है कि अब की बार सरकार इस विषय को गंभीरता से लेगी और वास्तव में ऐसी व्यवस्था तैयार करेगी, जो पहाड़ों में हो रही हलचल को समय रहते पकड़ सके और निचले इलाकों में रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का समय दे सके।