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October 01 2026 08:24 pm

पायलट रेडियो पर सीधे क्यों नहीं चिल्लाता 'विमान हाईजैक हो गया'? जानिए कॉकपिट के 3 जादुई कोड पूरा राज

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हवाई यात्रा के दौरान जब 35 हजार फीट की ऊंचाई पर कोई गंभीर संकट खड़ा हो जाए—चाहे वह कॉकपिट में किसी सिरफिरे का हमला हो, रेडियो संचार का ठप होना हो या फिर इंजन में तकनीकी खराबी—तो आपने अक्सर खबरों में सुना होगा कि विमान ने फौरन 'कोड 7500' या 'कोड 7700' भेजा। ऐसे में आम लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि संकट के समय पायलट सीधे एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को रेडियो पर बोलकर 'विमान हाईजैक हो गया' या 'विमान गिरने वाला है' क्यों नहीं कहता? वह अंकों के इन खुफिया कोड्स (Squawk Codes) का सहारा क्यों लेता है?

विमानन जगत में इन चार अंकों के कोड्स को केवल आंकड़े नहीं, बल्कि जीवन और मौत के बीच का सबसे सुरक्षित और खामोश अलार्म माना जाता है। आइए जानते हैं कि पायलट रेडियो पर बोलने से क्यों बचते हैं और क्या है '7500, 7600 और 7700' का असली राज।

पायलट सीधे रेडियो पर 'हाईजैक' क्यों नहीं बोलता?

विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी आपात स्थिति में पायलट द्वारा सीधे वॉयस रेडियो (माइक्रोफोन) पर स्थिति का ऐलान न करने के पीछे बेहद ठोस और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा कारण होते हैं:

हमलावर को भनक न लगने देना: यदि कोई अपहरणकर्ता या हथियारबंद व्यक्ति कॉकपिट में घुस चुका है या पायलट की कनपटी पर हथियार ताने खड़ा है, तो रेडियो पर "हम हाईजैक हो गए हैं" बोलते ही वह हिंसक होकर पायलट या यात्रियों को तुरंत नुकसान पहुंचा सकता है।

चुपचाप खतरे का संकेत (Silent Alarm): विमान के कंट्रोल पैनल पर मौजूद 'ट्रांसपोंडर' (Transponder) एक छोटा सा उपकरण होता है, जिस पर पायलट बिना किसी आवाज के, केवल उंगलियों के एक हल्के स्पर्श से चार अंकों का कोड सेट कर देता है। हमलावर को पता भी नहीं चलता और जमीन पर बैठे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की रडार स्क्रीन पर लाल रंग की बत्ती चमकने लगती है।

रेडियो चैनल जाम होने का डर: संकट के समय कई बार रेडियो फ्रीक्वेंसी व्यस्त होती है या उस पर अन्य विमान बात कर रहे होते हैं। ट्रांसपोंडर कोड सीधे सैटेलाइट और रडार सिग्नलों के जरिए एक मिलीसेकंड में कंट्रोल टॉवर तक पहुंच जाता है।

क्या है 7500, 7600 और 7700 का खुफिया गणित?

अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (ICAO) ने दुनिया भर के सभी यात्री विमानों के लिए तीन सार्वभौमिक आपातकालीन कोड तय किए हैं। दुनिया के किसी भी कोने में उड़ रहा विमान जब इन कोड्स को ट्रांसपोंडर पर डायल करता है, तो इसका मतलब पूरी दुनिया की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक समान होता है:

1. कोड 7500 (Squawk 7500): विमान पर अवैध कब्जा या हाईजैक

इसका मतलब: विमान के भीतर गैर-कानूनी दखल (Unlawful Interference) या अपहरण (Hijacking)।

क्या होता है इसके बाद: रडार स्क्रीन पर यह कोड आते ही ग्राउंड कंट्रोल तुरंत सुरक्षा प्रोटोकॉल एक्टिवेट कर देता है। संबंधित देश की वायुसेना (Air Force) को अलर्ट कर दिया जाता है और फाइटर जेट्स विमान को एस्कॉर्ट करने के लिए आसमान में भेज दिए जाते हैं। एटीसी पायलट से रेडियो पर कभी यह नहीं पूछता कि "क्या आप हाईजैक हो गए हैं?", बल्कि कोड की पुष्टि के लिए गुप्त तकनीकी सवाल पूछे जाते हैं।

2. कोड 7600 (Squawk 7600): रेडियो और संचार पूरी तरह ठप (Lost Comms)

इसका मतलब: जब विमान का रेडियो सिस्टम खराब हो जाए और पायलट न तो ग्राउंड कंट्रोल की आवाज सुन सके और न ही अपनी बात कह सके।

क्या होता है इसके बाद: इस कोड को देखते ही एटीसी समझ जाता है कि विमान नियंत्रण में है, लेकिन पायलट संपर्क से बाहर है। इसके बाद एटीसी विमान के आगे का पूरा एयरस्पेस खाली करा देता है और जमीन से लाइट गन (विशेष रंगीन रोशनी) के जरिए लैंडिंग के सिग्नल दिए जाते हैं।

3. कोड 7700 (Squawk 7700): जनरल इमरजेंसी (जीवन या विमान पर खतरा)

इसका मतलब: यह विमानन जगत का सबसे बड़ा आपातकालीन कोड है। इसका उपयोग इंजन फेल होने, केबिन का प्रेशर खत्म होने (डी-प्रेशराइजेशन), विमान में आग लगने, फ्यूल लीक होने या किसी यात्री को गंभीर हार्ट अटैक जैसी मेडिकल इमरजेंसी के समय किया जाता है।

क्या होता है इसके बाद: यह कोड सक्रिय होते ही संबंधित विमान को पूरे हवाई क्षेत्र में 'परम प्राथमिकता' (Absolute Priority) मिल जाती है। अन्य सभी उड़ानों को होल्डिंग पैटर्न में डाल दिया जाता है और निकटतम एयरपोर्ट के रनवे पर फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस तैनात कर दी जाती हैं।

पायलटों को याद रखने के लिए सिखाया जाता है यह फॉर्मूला

कमर्शियल फ्लाइंग स्कूल में हर भावी पायलट को इन तीनों कोड्स को जीवनभर याद रखने के लिए एक प्रसिद्ध अंग्रेजी तुकबंदी (Aviation Rhyme) सिखाई जाती है:

"75 - Taken alive" (7500 यानी कोई जीवित बंधक बना रहा है / हाईजैक)

"76 - In a fix" (7600 यानी रेडियो खराब हो गया है, बात नहीं हो पा रही)

"77 - Going to heaven" (7700 यानी जान पर भारी आफत / गंभीर तकनीकी संकट)

यही वजह है कि जब भी किसी उड़ान में तनाव या अनहोनी की आहट होती है, तो पायलट शब्दों की जंग लड़ने के बजाय खामोशी से इन कोड्स को ट्रांसपोंडर पर पंच कर देते हैं, जिससे जमीन पर मौजूद राहत और सुरक्षा एजेंसियां बिना एक सेकंड गंवाए हरकत में आ जाती हैं।