'हम सब मौत की ओर बढ़ रहे हैं...' सफलता की बड़ी कीमत चुकाने के बाद आखिर क्यों एक्टिंग छोड़ना चाहते हैं मनोज बाजपेयी
मनोरंजन डेस्क: भारतीय सिनेमा के सबसे उम्दा और संजीदा अभिनेताओं में शुमार मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। अपनी दमदार अदाकारी से हर किरदार में जान फूंकने वाले मनोज बाजपेयी हाल ही में मशहूर यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया (Ranveer Allahbadia) के पॉडकास्ट शो में नजर आए। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन, करियर और परिवार को लेकर कुछ ऐसे चौंकाने वाले और दार्शनिक खुलासे किए, जिसने उनके फैंस को भावुक कर दिया है। मनोज बाजपेयी ने बेहद बेबाकी से कहा कि वह अब जीवन की मोह-माया से ऊपर उठ चुके हैं और अब वह सिर्फ 'दाल-रोटी' चलाने या भौतिक सुख-सुविधाएं (Materialistic Things) कमाने के लिए एक्टिंग नहीं करना चाहते।
पिछले 10 सालों से बार-बार आता है एक्टिंग छोड़ने का ख्याल
इंटरव्यू के दौरान जब मनोज बाजपेयी से उनके करियर के भविष्य को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने एक ऐसा सच साझा किया जो उन्होंने आज तक किसी मंच पर नहीं कहा था। मनोज ने कहा, "मैं आपको पूरी सच्चाई बताता हूं। पिछले करीब 10 सालों से मेरे मन में बीच-बीच में यह ख्याल आता है कि मैं एक्टिंग छोड़ दूं। लेकिन फिर अचानक कोई ऐसा बेहतरीन रोल मेरे सामने आ जाता है कि मैं खुद को रोक नहीं पाता और दोबारा सेट पर चला जाता हूं। मैं अभिनय को किसी मजबूरी के तौर पर नहीं करना चाहता कि मुझे घर का खर्च चलाना है या अपनी जरूरतें पूरी करनी हैं।"
इसी बातचीत में उन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी एक दबी इच्छा भी जाहिर की। मनोज बोले, "आपके शो में मैं यह पहली बार कह रहा हूं— आजकल मेरा मन कुछ अलग तरह की कमर्शियल फिल्में (नॉनसेंस कॉमेडी या गानों पर नाचना) करने का कर रहा है, जिससे मैं हमेशा दूर रहा हूं। मैं चाहता हूं कि बस सेट पर जाऊं, बिना किसी तैयारी के मजे करूं और शाम को सबको गुडबाय बोलकर घर आ जाऊं, बिना यह सोचे कि मैं पर्दे पर क्या कर रहा हूं।"
दौलत और शोहरत की चुकाई बहुत बड़ी मानवीय कीमत
मनोज बाजपेयी ने अपने अतीत को याद करते हुए बेहद अफसोस के साथ बताया कि आज वह जिस मुकाम पर हैं, वहां पहुंचने के लिए उन्होंने अपने जीवन की सबसे कीमती चीज यानी अपने माता-पिता के साथ का समय कुर्बान कर दिया।
अभिनेता ने भावुक होकर कहा, "अगर मैं आज पीछे मुड़कर देखता हूं, तो पाता हूं कि मैंने बहुत कुछ खो दिया। मैं अपने पेरेंट्स के साथ कभी वक्त ही नहीं बिता पाया। जब वे इस दुनिया से गुजरे, तब हम एक-दूसरे को ठीक से समझने की कोशिश ही कर रहे थे। चूंकि हम गांव के रहने वाले थे, तो बचपन में मुझे पढ़ाई के लिए बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया। उसके बाद मैं एक्टर बनने का सपना लेकर दिल्ली आ गया। दिल्ली में मैंने बहुत संघर्ष किया, अंग्रेजी सीखी, शहर का माहौल समझा और हर दिन सिर्फ खाने का इंतजाम करने में ही पूरा वक्त निकल जाता था।"
सब कुछ हासिल करने के बाद लगता है— 'क्या यह वाकई वर्थ था?'
मनोज ने आगे बताया कि उनके संघर्ष के दिनों में उनके दोस्तों ने उन्हें पाला और उनकी बहुत मदद की, लेकिन इस पूरे सफर में माता-पिता से दूरी बढ़ती चली गई। तब फोन नहीं होते थे और सिर्फ चिट्ठियों के जरिए ही कभी-कभार बात हो पाती थी।
"भौतिक चीजों और सफलता की खोज में मैंने अपनी पारिवारिक जिंदगी को कुर्बान कर दिया। आज जब मुझे जीवन में सब कुछ हासिल हो गया है, तो कभी-कभी अकेले में बैठकर लगता है कि क्या यह सब वाकई 'वर्थ' (कीमती) था? मन में आता है कि काश! पिता के साथ कुछ और साल मिल जाते। मां के साथ जो कुछ वैचारिक मतभेद थे, शायद साथ रहकर उन्हें हमेशा के लिए खत्म कर पाता।"
'जिंदगी का आखिरी सच यही है कि हम मौत की तरफ बढ़ रहे हैं'
माता-पिता के जाने के बाद पुश्तैनी घर के अकेलेपन पर बात करते हुए मनोज ने कहा कि जब मां-बाप नहीं होते, तब उस घर की एक-एक दीवार और उस पर टंगी तस्वीरें बहुत याद आती हैं। उन्होंने जीवन का सबसे कड़वा सच बयां करते हुए कहा, “अब मैं अपने पैतृक घर जाता हूं तो वहां ज्यादा देर नहीं रुक पाता, क्योंकि वहां रुकने का अब कोई फायदा नहीं है। आपको जीवन के इस पड़ाव पर आकर यह कड़वी हकीकत माननी ही पड़ती है कि समय तेजी से निकल रहा है और हम सभी धीरे-धीरे अपनी मौत और अपनी अंतिम यात्रा की तरफ बढ़ रहे हैं। यही इस जीवन का एकमात्र और परम सच है।”