ईरान जंग के बीच मोसाद चीफ से क्यों उखड़े नेतन्याहू? 'सत्ता परिवर्तन' की वो फेल रिपोर्ट, जिसने इजरायल को फंसाया

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच इजरायल के सत्ता गलियारों से बड़ी खबर आ रही है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी ही खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) के प्रमुख डेविड बार्निया से बेहद नाराज बताए जा रहे हैं। नाराजगी की मुख्य वजह वह 'इंटेलिजेंस रिपोर्ट' है, जिसके आधार पर इजरायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंका था, लेकिन तीन हफ्ते बीत जाने के बाद भी वह योजना पूरी तरह फेल साबित हुई है।

मोसाद का वो 'दावा' जो हकीकत नहीं बन पाया

'इजरायल टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले मोसाद चीफ ने नेतन्याहू को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। इसमें दावा किया गया था कि:

जन विद्रोह: यदि ईरान की शीर्ष लीडरशिप को कमजोर किया जाता है, तो वहां की जनता सड़कों पर उतर आएगी और इस्लामिक सत्ता के खिलाफ बड़ा विद्रोह भड़क जाएगा।

अस्थिरता की योजना: मोसाद ने योजना बनाई थी कि हमलों के बाद एजेंसी ईरान के भीतर दंगों और विरोध प्रदर्शनों को हवा देगी, जिससे खामेनेई सरकार गिर जाएगी।

कुर्द मिलिशिया का साथ: रिपोर्ट में कुर्द समूहों के सहयोग से सरकार पलटने की उम्मीद जताई गई थी।

ट्रंप और नेतन्याहू का 'अह्वान' भी रहा बेअसर

मोसाद की इसी रिपोर्ट पर भरोसा करके नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर 28 फरवरी को हमले की रणनीति तैयार की थी। ट्रंप ने अपने पहले ही भाषण में ईरानी जनता से कानून हाथ में लेने और सड़कों पर उतरने की अपील की थी। नेतन्याहू ने भी जनता को 'आजादी' का लालच दिया। लेकिन हकीकत इसके उलट रही; बड़े हमलों और भारी तबाही के बावजूद ईरान के भीतर कोई बड़ा जन आंदोलन खड़ा नहीं हुआ।

ईरान हुआ और मजबूत, इजरायल की बढ़ी चिंता

अब तीन हफ्ते बाद इजरायली और अमेरिकी अधिकारी दबी जुबान में स्वीकार कर रहे हैं कि ईरान की सत्ता को उखाड़ फेंकना इतना आसान नहीं है। मोसाद की रिपोर्ट के विपरीत:

एकजुटता: बाहरी हमलों के बाद ईरानी जनता सरकार के खिलाफ होने के बजाय और अधिक एकजुट नजर आ रही है।

धार्मिक गुट: अलग-अलग धार्मिक गुटों में टकराव कराकर अस्थिरता पैदा करने की योजना भी धरी की धरी रह गई।

मजबूत पलटवार: ईरान कमजोर होने के बजाय अब इजरायल पर सीधे मिसाइल हमलों से पलटवार कर रहा है, जिससे इजरायल का डिफेंस बजट और सुरक्षा दोनों खतरे में हैं।

बैठक में फूटा नेतन्याहू का गुस्सा

खबरों के मुताबिक, युद्ध की समीक्षा के लिए हुई एक हालिया बैठक में नेतन्याहू ने मोसाद चीफ के सामने अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने शिकायत की कि "मोसाद का प्लान काम नहीं कर रहा है" और इस नाकामी की वजह से ट्रंप किसी भी समय सैन्य अभियान रोक सकते हैं (जैसा कि ट्रंप ने हाल ही में 5 दिन के ब्रेक का एलान किया है)।

मोसाद के पूर्व प्रमुख योसी कोहेन ने भी पहले आगाह किया था कि ईरान में शासन परिवर्तन मुश्किल है, इसलिए उन्होंने परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाने और प्रतिबंधों जैसे सीमित लक्ष्यों पर ध्यान दिया था। लेकिन वर्तमान नेतृत्व के 'बड़े जोखिम' ने अब इजरायल को एक लंबी और अनिश्चित जंग में धकेल दिया है।