राम मंदिर प्रशासन में बड़ा बदलाव: हर काम के लिए अब बनेगी अलग टीम, अधिकारियों की जवाबदेही होगी तय
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और कथित वित्तीय हेराफेरी के आरोपों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़े और ऐतिहासिक बदलावों की तैयारी शुरू हो गई है। व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनाने के लिए अब मंदिर के हर छोटे-बड़े कार्य के लिए एक स्पष्ट और कड़ा प्रोसीजर (एसओपी) लागू किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अब एकल स्तर पर यानी किसी एक व्यक्ति के स्तर पर फैसले लेने की प्रणाली पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और हर निर्णय एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामूहिक रूप से लिया जाएगा।
बिना अप्रूवल के नहीं शुरू होगा कोई काम, बनेंगे खास WhatsApp ग्रुप
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अब मंदिर परिसर या ट्रस्ट से जुड़ा कोई भी कार्य शुरू करने से पहले उसका औपचारिक प्रस्ताव तैयार करना अनिवार्य होगा। इस प्रस्ताव को संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों और निर्धारित अधिकारियों से अंतिम अनुमोदन (Approval) मिलने के बाद ही आगे बढ़ाया जाएगा। व्यवस्था को हाई-टेक और पारदर्शी बनाने के लिए अलग-अलग कार्यों के लिए विशेष डिजिटल रजिस्टर तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही, टीमों के बीच त्वरित संवाद और बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए विभिन्न विभागों के अलग-अलग आधिकारिक व्हाट्सऐप (WhatsApp) समूह भी बनाए जा रहे हैं ताकि हर गतिविधि का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।
आरोपियों के सोने-चांदी के संपर्कों और मददगारों पर शिकंजा
चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) को आरोपितों के संपत्तियों और उनके बाहरी संपर्कों को लेकर कई नई और चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। पुलिस और एसआईटी अब इस बात की गहन पड़ताल कर रही है कि चोरी किए गए चढ़ावे, विशेषकर सोने और चांदी को किन-किन लोगों को बेचा गया या कहां खपाया गया। आरोपियों के मददगारों और सहयोगियों पर शिकंजा कसने के लिए उनके कॉल डिटेल्स और हालिया मुलाकातों की सूची तैयार की जा रही है, जिसके आधार पर जल्द ही पुलिस स्तर से बड़ी कानूनी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
एसआईटी जांच में ट्रस्ट पदाधिकारियों के बयानों से घमासान
चढ़ावा चोरी के दूसरे चरण की जांच में एसआईटी अब ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों और बैंक कर्मचारियों के बयानों का नए तथ्यों से मिलान कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कई पदाधिकारियों ने एमओयू (MoU) और एसओपी (SOP) के पालन में अपनी भूमिका से पल्ला झाड़ते हुए दूसरों को जिम्मेदार ठहराया है। नोटों की गिनती करने वाले कर्मियों (गणना कर्मियों) और बैंक अधिकारियों पर सीधे तौर पर लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। कई पदाधिकारियों का दावा है कि सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी में हुई चूक में उनकी कोई सीधी जवाबदेही नहीं थी। हालांकि, एसआईटी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर हर स्तर पर बरती गई लापरवाही की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।