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September 11 2026 06:55 pm

भारतीय सेना के हथियार किसने चुराए? सुलझ गई मद्रास रेजिमेंट डकैती की गुत्थी; जांच में निकला 'इनसाइड जॉब'

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तेलंगाना के सिकंदराबाद स्थित सैन्य छावनी (Secunderabad Cantonment) के बोलारम में भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 20 मद्रास रेजिमेंट के हाई-सिक्योरिटी शस्त्रागार से घातक हथियारों और भारी गोला-बारूद की चोरी के बहुचर्चित मामले को सुरक्षा एजेंसियों ने सुलझा लिया है। देश के सबसे सुरक्षित सैन्य प्रतिष्ठानों में से एक से आधुनिक असॉल्ट राइफलों के गायब होने से भारतीय सेना, रक्षा मंत्रालय और खुफिया गलियारों में हड़कंप मच गया था।

तेलंगाना पुलिस, काउंटर-इंटेलिजेंस, मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की संयुक्त और गहन पड़ताल के बाद जांच अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से पुष्टि कर दी है कि यह कोई बाहरी डकैती नहीं, बल्कि सेना के भीतर के ही लोगों द्वारा रची गई एक सोची-समझी साजिश यानी 'इनसाइड जॉब' (Insider Job) थी। जांच एजेंसियों ने चोरी किए गए अधिकांश घातक हथियारों को हैदराबाद के विभिन्न ठिकानों से ट्रेस कर बरामद करने में बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है।

क्या-क्या हुआ था चोरी? गायब हथियारों की सूची ने उड़ा दिए थे होश

30 और 31 अगस्त की दरम्यानी रात बोलारम स्थित मद्रास रेजिमेंट के दो अलग-अलग आर्मरी कमरों के ताले तोड़कर यह सनसनीखेज चोरी की गई थी:

4 अत्याधुनिक AK-203 असॉल्ट राइफल्स (मैगजीन सहित)।

1 INSAS 1B1 असॉल्ट राइफल।

7 घातक पिस्तौलें (छह 9mm ऑटो 1A पिस्तौल और एक 6.35-बोर सिविलियन पिस्टल)।

1,000 से 1,800 से अधिक राउंड जिंदा गोला-बारूद (कारतूस)।

पैसिव नाइट-विजन दूरबीन (Night-Vision Binoculars) की एक जोड़ी।

हथियारों के वजन और आकार को देखते हुए यह साफ था कि 40 किलोग्राम से अधिक वजनी इस जखीरे को कोई एक अकेला व्यक्ति बिना पूर्व योजना और अंदरूनी मदद के सैन्य छावनी के कड़े सुरक्षा घेरे से बाहर नहीं ले जा सकता था।

40 मीटर दूर रखे थे हथियार और गोलियां, फिर भी किसी को नहीं लगी भनक

इस चोरी की कार्यप्रणाली ने जांच एजेंसियों को शुरुआत से ही चौंका दिया था। हथियार रखने का कमरा, जिसे सेना की भाषा में 'कोटे' (KOTE - Keeper of Technical Equipment) कहा जाता है, और गोला-बारूद रखने वाला कमरा यानी 'बटालियन मैगजीन', एक-दूसरे से करीब 40 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। दोनों के बीच में गार्ड रूम बना हुआ था और 24 घंटे हथियारों से लैस संतरी तैनात रहते हैं।

आरोपियों ने दोनों अलग-अलग कमरों के ताले तोड़े, लेकिन ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा गार्डों ने पुलिस को दिए शुरुआती बयान में दावा किया कि भारी बारिश के शोर और विजिबिलिटी कम होने के कारण उन्हें कुछ भी असामान्य नहीं दिखा। हालांकि, कंटीले तारों की बाड़ (Perimeter Fence) को काटे बिना और बिना किसी बाहरी जब्ती या तोड़फोड़ के हथियारों का बाहर निकल जाना साफ इशारा कर रहा था कि साजिशकर्ता पूरे कैंटोनमेंट के रास्तों, गार्डों की शिफ्ट टाइमिंग और ब्लाइंड स्पॉट्स से पूरी तरह वाकिफ था।

जांच में हुआ बड़ा खुलासा: आर्मरी रजिस्टर में भारी लापरवाही और संदेहास्पद भूमिका

जांच के दौरान जब मिलिट्री इंटेलिजेंस और पुलिस ने शस्त्रागार के रिकॉर्ड खंगाले, तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं:

रजिस्टरों में महीनों की लापरवाही: आर्मरी के स्टॉक रजिस्टर और हथियार जारी करने वाले लॉग बुक्स को कई महीनों से ठीक तरह से मेंटेन नहीं किया जा रहा था। सेना के कड़े प्रोटोकॉल के मुताबिक, हर शाम हथियारों की फिजिकल गिनती होना अनिवार्य है।

वरिष्ठ अधिकारियों और संतरी ड्यूटी से पूछताछ: 20 मद्रास रेजिमेंट के वरिष्ठ अधिकारियों, शस्त्रागार के प्रभारियों और उस रात ड्यूटी पर तैनात जवानों व अग्निवीरों से कड़ी पूछताछ की गई। प्राथमिक तौर पर पूछताछ के लिए करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद 4 मुख्य संदिग्धों पर शिकंजा कसा गया।

नाली में मिली थी खाली मैगजीन: घटना के बाद बैरकों के पास बरसाती नाले की तलाशी के दौरान एक खाली इंसास राइफल की मैगजीन बरामद हुई थी, जिससे यह अंदेशा पुख्ता हो गया कि सबूत छिपाने की कोशिशें अंदर से ही की जा रही थीं।

हैदराबाद में ट्रेस हुआ हथियारों का जखीरा, कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश

तेलंगाना पुलिस और भारतीय सेना ने एक संयुक्त अभियान में डिजिटल ट्रैकिंग, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और संदिग्धों की निशानदेही पर हैदराबाद के सुरक्षित ठिकानों से चोरी किए गए अधिकांश हथियारों को सफलतापूर्वक बरामद कर लिया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इन अत्याधुनिक हथियारों को किसी संगठित आपराधिक सिंडिकेट या अंडरवर्ल्ड नेटवर्क को मोटी रकम में बेचने की डील की गई थी।

सेना ने इस अभूतपूर्व सुरक्षा चूक और अनुशासनहीनता को बेहद गंभीरता से लिया है। पूरे मामले की गहन कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (Court of Inquiry) बैठा दी गई है। सेना के शीर्ष अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इतने संवेदनशील हथियारों की सुरक्षा में कोताही बरतने और इसमें शामिल पाए जाने वाले किसी भी सैन्यकर्मी या अधिकारी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कोर्ट-मार्शल सहित सख्त सैन्य कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।