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September 04 2026 09:03 pm

घर के मुख्य द्वार पर किस भगवान की फोटो लगाना होता है सबसे शुभ? जानिए मां लक्ष्मी, गणेश जी और वास्तु से जुड़े ये अचूक नियम

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वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को केवल आने-जाने का रास्ता नहीं बल्कि ऊर्जा का मुख्य प्रवेश द्वार माना गया है। सनातन संस्कृति और प्राचीन वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर का मुख्य द्वार वह संवेदनशील क्षेत्र है जहां से ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं, सकारात्मक शक्तियां और नकारात्मक प्रभाव सीधे हमारे जीवन पर असर डालते हैं। यदि मुख्य द्वार का निर्माण और सजावट वास्तु के नियमों के अनुकूल की जाए, तो घर में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास होता है। इसके विपरीत, यदि मुख्य द्वार पर अनदेखी की जाए या गलत चीजें या तस्वीरें लगा दी जाएं, तो जीवन में आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव और कलह-कलेश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अक्सर लोगों के मन में यह बड़ा कन्फ्यूजन रहता है कि आखिर घर के मुख्य द्वार पर किस देवी-देवता की तस्वीर या मूर्ति लगानी चाहिए और इससे जुड़े सटीक नियम क्या हैं। वास्तु शास्त्र के विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य द्वार पर कुछ चुनिंदा देवी-देवताओं के चित्र लगाने से घर का वास्तु दोष अपने आप दूर हो जाता है और दैवीय कृपा प्राप्त होती है।

मुख्य द्वार पर भगवान गणेश की फोटो लगाने का धार्मिक और वास्तुगत महत्व

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करना सबसे उत्तम और मंगलकारी माना जाता है। भगवान गणेश को सभी बाधाओं को दूर करने वाला और संकटमोचन माना गया है। मान्यता है कि जिस घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी का वास होता है, वहां नकारात्मक ऊर्जाएं कभी प्रवेश नहीं कर पाती हैं। हालांकि, गणेश जी की तस्वीर या मूर्ति लगाते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य द्वार पर गणेश जी की ऐसी तस्वीर लगानी चाहिए जिसमें वे बैठे हुए मुद्रा में नजर आएं। इसके साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखना बेहद आवश्यक है कि गणेश जी की पीठ घर के अंदर की तरफ न हो। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश की पीठ की तरफ दरिद्रता का वास माना जाता है, इसलिए गलती से भी ऐसी स्थिति न बनने दें। यदि आप बाहर की तरफ तस्वीर लगा रहे हैं, तो अंदर की तरफ मुख वाली तस्वीर या फिर दोनों तरफ मुख वाले गणेश जी (दृष्टि गणेश) लगाना बेहद शुभ फलदायी होता है। इससे घर में आने वाली हर बुरी नजर और बाधा स्वतः समाप्त हो जाती है और परिवार के सदस्यों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बने रहते हैं।

मां लक्ष्मी और कुबेर देव की तस्वीर से घर में बढ़ता है मनी फ्लो और बरकत

यदि आप अपने घर में धन के आगमन को बढ़ाना चाहते हैं और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहते हैं, तो वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार मुख्य द्वार पर माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर की तस्वीर या उनके प्रतीक चिन्हों को स्थापित करना चाहिए। इसके अलावा, आप चाहें तो मुख्य द्वार के दोनों ओर या फर्श पर मां लक्ष्मी के पवित्र पद चिह्न भी लगा सकते हैं। इन प्रतीकों को मुख्य द्वार पर लगाना अत्यंत शुभ और समृद्धिदायक माना जाता है। हालांकि, यहां भी एक महत्वपूर्ण नियम का पालन करना अनिवार्य है। मां लक्ष्मी की वही तस्वीर मुख्य द्वार पर लगानी चाहिए जिसमें वे बैठी हुई मुद्रा में नजर आएं। वास्तु विज्ञान के अनुसार, खड़ी हुई मुद्रा में मां लक्ष्मी की तस्वीर को मुख्य द्वार पर लगाना बिल्कुल भी सही नहीं माना जाता है। मान्यता है कि खड़ी लक्ष्मी का अर्थ होता है कि धन घर में रुकेगा नहीं और तेजी से खर्च हो जाएगा। इसके साथ ही मुख्य द्वार के दोनों किनारों पर रोली या सिंदूर से 'शुभ-लाभ' और 'स्वास्तिक' का चिह्न अवश्य बनाना चाहिए। स्वास्तिक का चिह्न सकारात्मक ऊर्जा को अपनी ओर आकर्षित करता है और घर में किसी भी प्रकार की बुरी बला को अंदर आने से रोकता है।

मुख्य द्वार पर भूलकर भी न लगाएं इन देवी-देवताओं की तस्वीरें

वास्तु शास्त्र में केवल सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने वाले प्रतीकों और देवताओं की स्थापना के बारे में ही नहीं बताया गया है, बल्कि कुछ ऐसे कड़े नियम भी हैं जो यह स्पष्ट करते हैं कि मुख्य द्वार पर किन देवी-देवताओं की तस्वीरें या मूर्तियां कभी नहीं लगानी चाहिए। वास्तु नियमों के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर कभी भी भगवान शिव के रौद्र रूप, महाकाल, शनिदेव या फिर मां काली की उग्र या डरावनी तस्वीरों को लगाने से हमेशा बचना चाहिए। इन देवी-देवताओं की ऊर्जा अत्यधिक तीव्र और प्रचंड होती है, जो घर के मुख्य द्वार जैसी संवेदनशील जगह पर पारिवारिक जीवन में उथल-पुथल या तनाव पैदा कर सकती है। मुख्य द्वार पर हमेशा शांत, सौम्य, और आशीर्वाद देने वाली मुद्रा वाले देवी-देवताओं के चित्रों को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उग्र स्वरूपों की पूजा हमेशा घर के भीतर मंदिर में विशेष विधान के साथ की जाती है, न कि प्रवेश द्वार पर। इसके अलावा, किसी भी मृत व्यक्ति, युद्ध के दृश्य, कांटेदार पौधे या जंगली जानवरों की खूंखार तस्वीरें भी मुख्य द्वार पर भूलकर भी नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि ये सभी नकारात्मकता और मानसिक अशांति को बुलावा देती हैं।

मुख्य द्वार से जुड़े अन्य जरूरी वास्तु, साफ-सफाई और प्रकाश के नियम

केवल देवी-देवताओं की तस्वीर लगा देने मात्र से ही वास्तु दोष समाप्त नहीं हो जाते, बल्कि इसके साथ कुछ अन्य व्यावहारिक और वास्तु नियमों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है। सबसे पहला नियम यह है कि मुख्य द्वार के आसपास का क्षेत्र हमेशा पूरी तरह से साफ-सुथरा और कचरा मुक्त होना चाहिए। दरवाजे के ठीक सामने या उसके आसपास कभी भी कूड़ेदान (Dustbin), टूटा-फूटा सामान या जूतों का रैक नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह मां लक्ष्मी के आगमन के मार्ग को बाधित करता है। इसके अलावा, इस बात का ध्यान विशेष रूप से रखना चाहिए कि मुख्य द्वार पर किसी भी प्रकार का अंधेरा न हो। शाम के समय या रात के वक्त मुख्य द्वार पर प्रकाश की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। जहां भी आपने भगवान की कोई तस्वीर या शुभ प्रतीक लगाया है, वहां एक छोटा और स्पष्ट बल्ब या फोकस लाइट जरूर जलनी चाहिए ताकि प्रवेश द्वार हमेशा प्रकाशवान और ऊर्जावान बना रहे। इन छोटे-छोटे लेकिन बेहद प्रभावशाली वास्तु नियमों का पालन करके आप अपने घर में सकारात्मकता, सुख, समृद्धि और निरंतर प्रगति के द्वार खोल सकते हैं।