विपक्ष को गन्ने में सिर्फ 'रसगुल्ला' दिखता है, जरूरत पड़ी तो लखनऊ भेजूंगा मीठा पैकेट
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसानी सियासत की धड़कन कहे जाने वाले सहारनपुर के रामपुर मनिहारान स्थित ऐतिहासिक गोचर कृषि इंटर कॉलेज मैदान में राष्ट्रीय लोकदल (RLD) की विशाल 'स्वाभिमान रैली' ने राज्य के सियासी पारे को अचानक सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। हजारों किसानों, नौजवानों और पार्टी समर्थकों की मौजूदगी के बीच केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्यमंत्री और रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व पर अब तक का सबसे करारा और व्यंग्यात्मक राजनीतिक हमला बोला। जयंत चौधरी ने विपक्ष के दोहरे चरित्र को बेनकाब करते हुए कहा कि जब बाजार में चीनी, रसगुल्ले और गुलाब जामुन की कीमतें बढ़ती हैं, तो विपक्ष संसद से लेकर सड़क तक हाय-तौबा मचाने लगता है, लेकिन जब उसी चीनी को पैदा करने वाले अन्नदाता किसान के गन्ने के भाव और उसकी लागत का सवाल आता है, तो विपक्ष के मुंह पर ताला लग जाता है।
जयंत चौधरी ने बेहद तल्ख और चुटीले अंदाज में कहा कि विपक्ष को आज भी केवल उपभोक्ताओं का रसगुल्ला ही दिखाई दे रहा है। उन्होंने मंच से ऐलान किया कि वे इस मुद्दे पर विपक्ष के नेताओं को बाकायदा एक विस्तृत पत्र लिखकर किसानों की वास्तविक स्थिति से अवगत कराएंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि यदि इसके बाद भी विपक्षी नेताओं की सहमति बनी, तो वे विशेष तौर पर लखनऊ उनके पते पर रसगुल्ले का बड़ा पैकेट भिजवाएंगे ताकि उन्हें समझ आए कि इस मिठास के पीछे किसान का कितना पसीना बहता है। जयंत के इस तंज पर रैली मैदान में मौजूद हजारों ग्रामीणों और किसानों ने तालियों और ठहाकों के साथ समर्थन जताया, जिसने इस रैली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक परिघटना बना दिया।
'महंगी चीनी पर हाय-हाय, तो गन्ने पर चुप्पी क्यों?' 400 पार सीटों के साथ 400 पार गन्ने का भाव
गन्ना बेल्ट के किसानों की सबसे बड़ी दुखती रग यानी गन्ने के समर्थन मूल्य को सीधे छूते हुए जयंत चौधरी ने विपक्षी दलों की राजनीति को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता के हितों की आड़ लेकर उत्पादक किसान के हितों की बलि नहीं दी जा सकती। जब कारखानों में बनने वाले हर सामान की कीमत लागत के हिसाब से तय होती है, तो किसान की फसल पर यह दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जाता है? जयंत ने अपने पुराने चुनावी संकल्प को दोहराते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोकदल अपने मूल एजेंडे से कभी पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि जिस दिन विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 400 पार सीटें हासिल करेगा, उसी दिन उत्तर प्रदेश में गन्ने का मूल्य भी 400 रुपये प्रति क्विंटल के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगा।
उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा चीनी मिलों से किसानों को सीधे बैंक खातों में किए जा रहे रिकॉर्ड गन्ना भुगतान का आंकड़ा भी जनता के सामने रखा। जयंत ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में जहां किसान सालों-साल बकाए के लिए मिलों के चक्कर काटते थे, वहीं आज आधुनिक डिजिटल व्यवस्था और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के चलते अधिकांश भुगतान समय-सीमा के भीतर हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने खांडसारी और पारंपरिक कोल्हू इकाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि जब बड़ी मिलों में पेराई में देरी होती है, तो ये इकाइयां किसानों को तत्काल नकदी का विकल्प देती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार तक किसानों की बात पहुंचाकर इन लघु ग्रामीण उद्योगों को टैक्स और नियमों में राहत दिलाने का भी श्रेय लिया।
एथेनॉल नीति पर सपा को घेरा: 'चौधरी अजित सिंह के विजन का विरोध कर रहे हैं अखिलेश'
कृषि आधारित ऊर्जा नीतियों पर बोलते हुए जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी द्वारा एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोजेक्ट्स के विरोध को उनकी संकीर्ण मानसिकता का परिचायक करार दिया। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दिग्गज किसान नेता स्वर्गीय चौधरी अजित सिंह की दूरदृष्टि को याद करते हुए कहा कि चौधरी साहब अपने पूरे राजनीतिक जीवन में इस बात की वकालत करते रहे कि गन्ने, मक्के और अतिरिक्त धान से एथेनॉल और कंप्रेस्ड बायो-गैस (CBG) बनाई जानी चाहिए। जब देश में पेट्रोल और डीजल के साथ एथेनॉल मिलाया जाएगा, तो अरबों डॉलर का विदेशी तेल आयात घटेगा और वही पैसा सीधे भारत के गन्ना और मक्का किसानों की जेब में जाएगा।
जयंत ने सपा पर प्रहार करते हुए कहा कि आधुनिक ऊर्जा नीति और बायोगैस प्लांट्स का विरोध करके विपक्ष न केवल पर्यावरण का नुकसान कर रहा है, बल्कि किसानों को मिलने वाली अतिरिक्त आय के रास्ते भी बंद करना चाहता है। उन्होंने कहा कि सीबीजी और एथेनॉल प्लांट लगने से गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा होंगे और किसानों को बेहद सस्ती जैविक खाद उपलब्ध होगी। जयंत का स्पष्ट संदेश था कि खेती को अब केवल पारंपरिक गेहूं-धान की फसलों तक सीमित नहीं रखा जा सकता; इसे आधुनिक तकनीक, वैल्यू-एडिशन और बायो-फ्यूल इंडस्ट्री से जोड़ना ही किसान को समृद्ध बनाने का एकमात्र रास्ता है।
'पीडीए की फुल फॉर्म तक नहीं पता, पीडीए ही उनकी पीड़ा है': सपा के मुख्य नैरेटिव पर करारी चोट
सहारनपुर के मंच से जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े राजनीतिक हथियार 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने कहा कि सपा की राजनीति में हर चुनाव के साथ नारों के नाम और परिभाषाएं बदल जाती हैं। उन्होंने व्यंग्य कसते हुए कहा, "इनके पीडीए की असली फुल फॉर्म क्या है, यह खुद उनके नेताओं को नहीं मालूम। सच तो यह है कि पीडीए कोई सामाजिक समीकरण नहीं है, बल्कि चुनाव में बार-बार मिल रही हार और सत्ता से बेदखल होने की जो 'पीड़ा' उनके भीतर छटपटा रही है, वही पीडीए बनकर बाहर निकल रही है।"
अखिलेश यादव द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों और रालोद पर किए जा रहे हमलों का जवाब देते हुए जयंत ने कहा कि जो लोग आज हमें गालियां दे रहे हैं या हमारा उपहास उड़ा रहे हैं, वे समझ लें कि हम सही वक्त पर लोकतांत्रिक तरीके से पाई-पाई का हिसाब चुकता करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि जब आपके विरोधियों की जुबान से दिन-रात राष्ट्रीय लोकदल का नाम न हटे, तो समझ लीजिए कि आपका संगठन बिल्कुल सही दिशा में काम कर रहा है और आपकी ताकत से विरोधियों के खेमे में भयंकर बेचैनी फैल चुकी है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की विरासत किसी एक परिवार की बपौती नहीं है; पाल, यादव, गुर्जर, जाट, सैनी, कश्यप समेत देश का हर मेहनतकश किसान समुदाय उस महान विरासत का बराबर का हिस्सेदार है।
सीएम योगी के तेवरों की तारीफ: 'गुंडों के लिए सख्त, पर किसानों के लिए बेहद नरम है दिल'
रैली में जयंत चौधरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रशासनिक दृष्टिकोण की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ योगी सरकार का रुख जितना कठोर है, किसानों और गरीबों की समस्याओं के समाधान के मामले में मुख्यमंत्री का दिल उतना ही संवेदनशील और नरम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल का यह एनडीए गठबंधन पूरी तरह मजबूत, अटूट और दूरगामी लक्ष्यों के लिए समर्पित है। यह गठबंधन किसी स्वार्थ या अवसरवादिता पर नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समग्र विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बना है।
जयंत ने युवाओं से पारंपरिक नौकरियों के मोह से बाहर निकलकर कौशल विकास, वोकेशनल ट्रेनिंग और नए स्टार्टअप्स की ओर कदम बढ़ाने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि आज का नौजवान केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला उद्यमी बनने का माद्दा रखता है। इसी अवसर पर उन्होंने गोचर कृषि इंटर कॉलेज के खेल मैदान के विकास के लिए अपने सांसद व मंत्री कोटे से एक अत्याधुनिक 'मिनी खेल स्टेडियम' बनवाने की औपचारिक घोषणा की, जिससे क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं को सेना, पुलिस और राष्ट्रीय खेलों की तैयारी के लिए आधुनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
चारू चौधरी का स्वाभिमान पर ओजस्वी संबोधन: 'चौधराहट बचानी है तो अपने मंच को मजबूत करो'
स्वाभिमान रैली का सबसे भावनात्मक और प्रभावशाली क्षण वह था जब मंच से जयंत चौधरी की धर्मपत्नी चारू चौधरी ने माइक संभाला। मंच पर अपनी बेटी सायरा चौधरी के साथ मौजूद चारू चौधरी ने विपक्षी हमलों का सीधे जवाब देते हुए कहा कि विरोधियों की स्तरहीन बयानबाजी उनके अहंकार और घटिया मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने गर्व से सिर उठाकर कहा, "मुझे इस बात का अपार गर्व है कि मेरा विवाह इस महान किसान समाज में हुआ है, जिसका देश की सीमाओं की रक्षा और अन्न उपजाने में सबसे अग्रणी योगदान रहा है। मुझे अपने दल पर गर्व है और सबसे बढ़कर मुझे अपने पति जयंत पर गर्व है, जो हर परिस्थिति में आपके मान-सम्मान के लिए डटकर खड़े रहते हैं।"
चारू चौधरी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को झकझोरते हुए कहा कि चुनाव आते-जाते रहेंगे, सरकारें बनती और बिगड़ती रहेंगी, जीत-हार से कोई फर्क नहीं पड़ता; लेकिन यदि इस समाज को अपनी ऐतिहासिक चौधराहट, अपनी क्षेत्रीय पहचान और अपने स्वाभिमान को हमेशा जिंदा रखना है, तो उसे अपने खुद के मंच और अपनी पार्टी को सबसे ज्यादा ताकतवर बनाना होगा। उन्होंने उपस्थित जनसैलाब को संकल्प दिलाया कि चाहे जो भी कुर्बानी देनी पड़े, राष्ट्रीय लोकदल किसान समाज के सम्मान पर कभी आंच नहीं आने देगा।
2027 के महासमर की बिसात: पश्चिमी यूपी में मजबूत जमीन तलाशती रालोद की नई रणनीति
सहारनपुर के रामपुर मनिहारान की यह स्वाभिमान रैली केवल एक सामान्य जनसभा नहीं थी, बल्कि यह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर पश्चिमी यूपी की सियासी जमीन पर रालोद की शक्ति का खुला प्रदर्शन थी। बिजनौर सांसद चंदन चौहान, पूर्व सांसद मलूक नागर, बिट्टू नंबरदार और कल्याण सिंह जैसे कद्दावर नेताओं के संचालन व मौजूदगी में आयोजित इस रैली ने साफ कर दिया है कि रालोद अब सिर्फ एक सीमित दायरे की पार्टी नहीं रहना चाहती, बल्कि वह सर्वसमाज—जाट, गुर्जर, दलित, सैनी और मुस्लिम किसानों—को एक साथ साधकर एनडीए की सबसे मजबूत ढाल बनने की दिशा में आगे बढ़ चुकी है।
जयंत चौधरी का यह 'रसगुल्ला तंज' आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के हर नुक्कड़, चौपाल और टीवी डिबेट का मुख्य विमर्श बनने जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के मन में यह संदेश स्थापित करने में जयंत काफी हद तक सफल रहे हैं कि समाजवादी पार्टी जहां केवल चुनावी लाभ के लिए जातिगत नारों और उपभोक्ता राजनीति में उलझी है, वहीं रालोद सत्ता में रहकर भी सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और मुख्यमंत्री आवास तक किसानों की वास्तविक समस्याओं को पहुंचाकर समाधान कराने का दम रखती है। सहारनपुर के मैदान से उठी यह सियासी हुंकार लखनऊ से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक गूंज रही है।