जब कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में छात्रा के साथ 7 लड़कों ने की दरिंदगी और पीड़ित पर ही मढ़ दिया दोष
विश्व के प्रतिष्ठित 'आईवी लीग' (Ivy League) संस्थानों में शुमार अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (Cornell University) को ज्ञान, बौद्धिक विमर्श और आधुनिक सोच का गढ़ माना जाता है। लेकिन इसी प्रतिष्ठित परिसर की चारदीवारी के पीछे से जब एक रूह कंपा देने वाली दास्तां सामने आई, तो पूरे वैश्विक शिक्षा जगत में सन्नाटा पसर गया। सात लड़कों द्वारा एक बेबस छात्रा के साथ की गई बर्बरता और उसके बाद मामले को दबाने के लिए गढ़ी गई 'सब उसकी मर्जी से हुआ' की घिनौनी दलील ने उस कड़वे सच को बेनकाब कर दिया, जिसे अक्सर बड़े ब्रांड नेम के पीछे छिपाने की कोशिश की जाती है। न्याय की गुहार लगाने वाली छात्रा को किस तरह मानसिक यातना और 'विक्टिम शेमिंग' के खौफनाक दौर से गुजरना पड़ा, यह मामला उसकी एक दर्दनाक मिसाल है।
फ्रेटर्निटी पार्टी और शराब के नशे में बुना गया खौफनाक जाल
घटना की शुरुआत अमेरिकी विश्वविद्यालयों की कुख्यात 'फ्रेटर्निटी' (Fraternity/Greek Life) पार्टी कल्चर से जुड़ी है। कैंपस में आयोजित एक निजी पार्टी के दौरान छात्रा को अत्यधिक नशे की हालत में ले जाया गया। आरोप है कि जब पीड़िता खुद का बचाव करने और विरोध जताने की शारीरिक स्थिति में नहीं थी, तब संस्थान से जुड़े सात लड़कों ने बंद कमरे में बारी-बारी से उसके साथ दरिंदगी की।
हॉस्टल और कैंपस की सुरक्षित मानी जाने वाली परिधि में इस सामूहिक कृत्य को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने सबूतों को मिटाने और मामले को सामान्य 'म्यूचुअल कंसेंट' (आपसी सहमति) का रूप देने की साजिश पहले ही रच ली थी। पीड़िता जब होश में आई और ट्रॉमा से बाहर निकलकर उसने न्याय के लिए आवाज उठाई, तो असल खौफनाक खेल शुरू हुआ।
'सब उसकी मर्जी से हुआ': आरोपी तंत्र की घिनौनी चाल और विक्टिम शेमिंग
जब पीड़िता ने इस बर्बरता की शिकायत प्रशासनिक स्तर पर की, तो न्याय मिलने के बजाय उसे आरोपियों और उनके रसूखदार परिवारों के भारी दबाव का सामना करना पड़ा। आरोपियों और उनके बचाव पक्ष की पूरी रणनीति पीड़िता के चरित्र हनन (Character Assassination) पर टिक गई:
'म्यूचुअल कंसेंट' का झूठा नैरेटिव: आरोपियों ने एक सुर में दावा किया कि जो कुछ भी हुआ, वह छात्रा की पूरी रजामंदी से हुआ था।
सोशल मीडिया पर चरित्र हनन: पीड़िता के कपड़े, उसकी पार्टी में मौजूदगी और शराब पीने के फैसले को आधार बनाकर उसे ही दोषी ठहराने की कोशिश की गई।
मानसिक प्रताड़ना: कैंपस के भीतर पीड़िता का बहिष्कार करने और उसे झूठा साबित करने के लिए तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गईं, जिससे पीड़िता गंभीर डिप्रेशन और सदमे की स्थिति में पहुंच गई।
आंतरिक जांच कमेटियों और 'आईवी लीग' के सिस्टम पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और अमेरिकी उच्च शिक्षण संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानून 'टाइटल नाइन' (Title IX) के क्रियान्वयन की पोल खोलकर रख दी। अक्सर देखने में आता है कि विश्वविद्यालय अपनी वैश्विक साख, ब्रांड वैल्यू और अरबों डॉलर के डोनेशन को बचाने के लिए ऐसे गंभीर यौन अपराधों पर पर्दा डालने या उन्हें कॉलेज के स्तर पर ही रफा-दफा करने का प्रयास करते हैं।
छात्र संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कैंपस में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। सवाल उठाया गया कि जब एक लड़की असहाय और अचेत अवस्था में थी, तो कोई भी कानून उसे 'सहमति' कैसे मान सकता है? विधिक मानकों के अनुसार, नशे या लाचारी की स्थिति में ली गई किसी भी सहमति का कोई कानूनी वजूद नहीं होता।
साख बचाने की कोशिश में सिस्टम बेनकाब
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी का यह प्रकरण केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह उस सामंती और रसूखदार मानसिकता का आईना है जो अपराध करने के बाद भी पीड़ित को ही कटघरे में खड़ा कर देती है। छात्रों के भारी दबाव और मीडिया में मामला उछलने के बाद प्रशासन को फ्रेटर्निटीज पर कई पाबंदियां लगानी पड़ीं और सुरक्षा नियमों की समीक्षा करनी पड़ी। हालांकि, यह कड़वी सच्चाई आज भी जिंदा है कि जब तक संस्थान अपनी इमेज बचाने से ऊपर उठकर अपराधियों को सख्त सजा नहीं दिलाएंगे, तब तक किसी भी छात्रा के लिए सुरक्षा के दावे केवल कागजी साबित होंगे।