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October 01 2026 10:42 pm

ट्रैफिक नियम तोड़ना अब पड़ेगा भारी! चालान नहीं भरा तो ब्लॉक होंगी RC, फिटनेस और PUC

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सड़क पर लाल बत्ती पार करने, ओवरस्पीडिंग करने या बिना हेलमेट-सीटबेल्ट गाड़ी चलाने के बाद मोबाइल पर आए ई-चालान को नजरअंदाज करना अब वाहन चालकों को बेहद महंगा पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने देश में बिना भुगतान वाले ई-चालानों की बढ़ती संख्या पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने साफ कहा है कि जब तक लंबित चालान का पूरा जुर्माना नहीं भरा जाता, तब तक संबंधित वाहन का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC), रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) का रिन्यूअल, मालिकाना हक का ट्रांसफर और ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल जैसी सभी जरूरी सेवाएं पूरी तरह रोक दी जाएं।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सड़क सुरक्षा को लेकर चल रहे एक मामले की सुनवाई करते हुए यह ऐतिहासिक आदेश दिया। अदालत ने दो-टूक कहा कि सिर्फ लाखों की संख्या में ई-चालान काटने से काम नहीं चलेगा, जब तक जमीनी स्तर पर जुर्माने की वसूली सुनिश्चित न हो।

वाहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट होंगी गाड़ियां: क्या-क्या सेवाएं रुकेंगी?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, बकाया चालान वाली गाड़ियों पर शिकंजा कसने के लिए केंद्रीय परिवहन पोर्टल पर वाहनों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। इसके बाद वाहन मालिकों को इन प्रमुख सेवाओं से हाथ धोना पड़ेगा:

पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) पर रोक: कोई भी प्रदूषण जांच केंद्र (PUC Center) उस वाहन को प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी नहीं कर सकेगा, जिस पर ई-चालान का जुर्माना बकाया है।

RC और ओनरशिप ट्रांसफर बंद: वाहन के रजिस्ट्रेशन का रिन्यूअल, डुप्लीकेट आरसी जारी करना, पते में बदलाव और गाड़ी की बिक्री के बाद ओनरशिप ट्रांसफर की प्रक्रिया तब तक नहीं होगी जब तक चालान क्लीयर न हो।

फिटनेस सर्टिफिकेट अटका: व्यावसायिक और भारी वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।

ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल और निलंबन: बार-बार नियम तोड़ने वाले आदतन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यूअल रोका जाएगा और मौजूदा लाइसेंस को निलंबित करने की कार्रवाई की जाएगी।

23,000 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना अटका, कागजों तक सीमित न रहें आदेश

अदालत को सौंपी गई रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया कि देश भर में जारी किए गए ई-चालानों के तहत करीब ₹49,194 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था, जिसमें से अब तक मात्र ₹26,175 करोड़ ही वसूले जा सके हैं। यानी ₹23,000 करोड़ से अधिक की भारी-भरकम राशि आज भी वाहन मालिकों पर बकाया है।

पीठ ने गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह मामला 2012 से (एस. राजसीकरन बनाम भारत सरकार) चल रहा है। अदालत 14 साल से सड़क सुरक्षा नियमों पर नजर रख रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न होने से नियम सिर्फ कागजों में सिमट कर रह जाते हैं। पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़कों पर वाहनों की औचक जांच (Random Checking) बढ़ाई जाए और बकाया चालान मिलने पर वाहनों को जब्त (Impound) करने से भी न हिचकिचाएं।

1 साल में 5 उल्लंघन तो माना जाएगा 'खतरा'

अदालत ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के संशोधित नियम 21(25) का हवाला देते हुए रेखांकित किया कि यदि कोई वाहन चालक एक वर्ष के भीतर पांच या उससे अधिक बार यातायात नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे आम जनता की सुरक्षा के लिए 'खतरा' माना जाएगा। ऐसे मामलों में दंडात्मक कार्रवाई और भी कड़ी होगी।

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ओवरलोडिंग पर भी कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि क्षमता से अधिक माल ढोने वाले किसी भी ट्रक या मालवाहक वाहन को मौके से तब तक आगे न जाने दिया जाए, जब तक कि उसमें से अतिरिक्त भार खाली न करा लिया जाए। टोल प्लाजा पर लगे वे-इन-मोशन और वेब्रिज सिस्टम को इलेक्ट्रॉनिक निगरानी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि दूसरे राज्य की सीमा में प्रवेश करने पर भी चालक कार्रवाई से न बच सकें।