दुनिया की सबसे खूंखार सेना! क्या है IRGC, जिसके दम पर अमेरिका और इजरायल जैसी महाशक्तियों को ललकार रहा है ईरान...
India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—IRGC यानी 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स'। अमेरिका की सैन्य ताकत और इजरायल की खुफिया एजेंसी 'मोसाद' की पैनी नजरों के बावजूद ईरान अगर सीना तानकर खड़ा है, तो उसके पीछे सबसे बड़ी वजह यही सेना है। IRGC केवल एक सैन्य बल नहीं है, बल्कि यह ईरान की सत्ता, अर्थव्यवस्था और विदेशी ऑपरेशनों की रीढ़ मानी जाती है। आखिर इस संगठन में ऐसा क्या खास है जो इसे दुनिया की सबसे ताकतवर और रहस्यमयी सेनाओं की फेहरिस्त में खड़ा करता है?
ईरान की समानांतर सेना: सामान्य सेना से कितनी अलग है IRGC?
ईरान में दो तरह की सेनाएं काम करती हैं। एक है नियमित सेना (Artesh), जिसका काम सीमाओं की रक्षा करना है। लेकिन IRGC का गठन 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद खास तौर पर देश के 'इस्लामी तंत्र' को आंतरिक और बाहरी खतरों से बचाने के लिए किया गया था। आज IRGC के पास अपनी खुद की थल सेना, नौसेना और वायु सेना है। इतना ही नहीं, ईरान का पूरा मिसाइल प्रोग्राम और परमाणु कार्यक्रम भी इसी के नियंत्रण में है। इसकी सबसे घातक इकाई 'कुद्स फोर्स' (Quds Force) है, जो विदेशी धरती पर खुफिया ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए जानी जाती है।
मध्य पूर्व में ईरान का 'प्रॉक्सि नेटवर्क' और IRGC का जाल
अमेरिका और इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती IRGC का वह नेटवर्क है, जो पूरे मध्य पूर्व में फैला हुआ है। लेबनान में हिजबुल्लाह, गाजा में हमास और यमन में हूतियों को ट्रेनिंग और हथियारों की सप्लाई करने का जिम्मा इसी बल के पास है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि IRGC ने एक ऐसा 'एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस' तैयार किया है, जिसके जरिए ईरान बिना सीधे युद्ध में उतरे अपने दुश्मनों को घेरने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि तमाम प्रतिबंधों के बावजूद ईरान की पकड़ अपने क्षेत्र में कमजोर नहीं हुई है।
ईरानी अर्थव्यवस्था पर भी IRGC का कड़ा कब्जा
IRGC की ताकत केवल हथियारों तक सीमित नहीं है। ईरान की अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से पर इसका सीधा प्रभाव है। निर्माण, तेल और गैस, दूरसंचार और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़ी कई बड़ी कंपनियां IRGC द्वारा संचालित की जाती हैं। इस आर्थिक शक्ति के दम पर यह संगठन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को धता बताते हुए अपने सैन्य अभियानों के लिए फंड जुटाने में सक्षम है। जानकारों के अनुसार, जब तक IRGC ईरान की ढाल बना हुआ है, तब तक किसी भी बाहरी ताकत के लिए ईरान के सामने सैन्य जीत हासिल करना एक टेढ़ी खीर साबित होगा।