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July 19 2026 05:28 am

उद्धव की सेना में महाविस्फोट: 4 साल में दूसरी बार टूटी शिवसेना, 6 सांसदों ने थामा एकनाथ शिंदे का दामन

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महाराष्ट्र के सियासी समर से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और बड़ी खबर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चार साल के भीतर दूसरा और सबसे घातक झटका लगा है। महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन की मजबूत धुरी माने जाने वाले उद्धव ठाकरे का संसदीय किला पूरी तरह ढह गया है। सूत्रों और पुख्ता रिपोर्टों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंकते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली ऑरिजनल 'शिवसेना' को अपना समर्थन देने का औपचारिक वादा कर दिया है।

इस महा-टूट के बाद उद्धव ठाकरे खेमे में मातम पसरा है, वहीं महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक की राजनीति में भूचाल आ गया है।

कौन हैं वो 6 'बागी' सांसद जिन्होंने छोड़ा उद्धव का साथ? List

शिंदे गुट में शामिल होने वाले उद्धव सेना के दिग्गजों की सूची सामने आ चुकी है। इन बागी सांसदों के नाम निम्नलिखित हैं:

नागेश पाटिल अष्टिकर

संजय उत्तमराव देशमुख

ओमराजे निंबालकर

संजय (बांडू) जाधव

संजय दीना पाटिल

भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे

उद्धव ठाकरे के पास बचे अब सिर्फ 3 वफादार सांसद

बगावत की इस आंधी में उद्धव ठाकरे का साथ देने के लिए अब लोकसभा में केवल 3 सांसद ही बचे हैं। बुधवार, 17 जून को नई दिल्ली में जब संजय राउत ने आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई, तो उनके बगल में सिर्फ यही 3 वफादार चेहरे खड़े नजर आए:

अरविंद सावंत

अनिल देसाई

राजभाऊ वाजे

"बीजेपी ने लोकतंत्र को बाजार बनाया, 15 करोड़ में बिके सांसद" — भड़के संजय राउत

इस अप्रत्याशित फूट से तिलमिलाए शिवसेना (UBT) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला।

संजय राउत ने बेहद गंभीर और बड़े आरोप लगाते हुए कहा:

"बीती रात महाराष्ट्र के जनादेश के साथ सबसे बड़ा धोखा हुआ है। हमारे सांसदों को डरा-धमकाकर और लालच देकर खरीदा-बेचा गया है। हमारे पास पुख्ता जानकारी है कि महाराष्ट्र के इन सांसदों को 15-15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम देकर खरीदा जा रहा है। भाजपा ने हमारे पवित्र लोकतंत्र को एक खुला बाजार (मंडी) बना दिया है। बेहतर होगा कि भाजपा अब नेताओं को खरीदने के लिए अपनी 'तय दरों' (Fix Rates) की आधिकारिक घोषणा ही कर दे।"

"हिम्मत है तो पहले सांसद पद से इस्तीफा दो"

राउत ने बागी हुए 6 सांसदों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो वे पहले अपने पदों से इस्तीफा दें और फिर पाला बदलें। उन्होंने कहा, "ये सभी लोग उद्धव ठाकरे के चेहरे, शिवसेना के नाम और हमारे जमीन पर खून-पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं की मेहनत की बदौलत चुनाव जीते हैं। अगर देश में इसी तरह तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना जैसी क्षेत्रीय पार्टियों को सत्ता के दम पर तोड़ा जाता रहेगा, तो देश में चुनाव कराने का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा।"

महाराष्ट्र की राजनीति में आगे क्या?

संजय राउत ने हालांकि यह भी कहा कि तकनीकी रूप से अभी तक किसी भी सांसद ने पार्टी को कोई आधिकारिक विद्रोही पत्र नहीं सौंपा है, लेकिन दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) ओम बिरला को पत्र लिखकर अयोग्यता और व्हिप उल्लंघन की तैयारी शुरू कर दी गई है।

साल 2022 में एकनाथ शिंदे द्वारा की गई ऐतिहासिक बगावत (जिसमें 40 विधायक टूटे थे) के बाद, साल 2026 में सांसदों की यह बड़ी बगावत उद्धव ठाकरे के राजनीतिक अस्तित्व के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है।