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October 06 2026 06:13 pm

काजी तौकीर से जलने लगी थीं रीति तिवारी? सिंगर ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 'मैं यह मानने से डरती नहीं हूं कि...'

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भारतीय टेलीविजन इतिहास में जब भी शुरुआती म्यूजिकल रियलिटी शोज़ की बात होती है, तो साल 2005 के ब्लॉकबस्टर शो 'फेम गुरुकुल' का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यह वही मंच था जिसने देश को अरिजीत सिंह जैसा सुरों का जादूगर दिया और कश्मीर के काजी तौकीर को रातों-रात नेशनल क्रश बना दिया था। उस दौर में काजी तौकीर की गायकी को लेकर भले ही जजों के बीच मतभेद रहे हों, लेकिन जनता के वोटों के मामले में उनकी लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं था। अब उसी मंच की प्रतिभाशाली फाइनलिस्ट रहीं गायिका रीति तिवारी ने सालों बाद उस दौर के माहौल, बैकस्टेज तनाव और काजी तौकीर को लेकर अपने मन में आई ईर्ष्या (Jealousy) पर बेहद हैरान कर देने वाला और ईमानदार खुलासा किया है।

रीति तिवारी ने एक हालिया इंटरव्यू में बिना किसी हिचकिचाहट के स्वीकार किया है कि शो के दौरान एक वक्त ऐसा आया था जब वे काजी तौकीर से इनसिक्योर होने लगी थीं और उनके मन में जलन का भाव आ गया था। आमतौर पर कलाकार अपनी कमजोरियों और जलन को सार्वजनिक रूप से कबूल करने से बचते हैं, लेकिन रीति ने दो-टूक कहा कि वे सच को स्वीकार करने से बिल्कुल नहीं डरती हैं।

'हम रियाज करते रह गए और वो वोट्स ले गया': रीति ने बयां किया दर्द

बातचीत के दौरान रीति तिवारी ने 'फेम गुरुकुल' के दिनों की यादें ताजा करते हुए बताया कि गुरुकुल के अंदर सभी कंटेस्टेंट्स सुबह से रात तक क्लासिकल गायकी, सुर और ताल साधने के लिए घंटों पसीना बहाते थे। लेकिन जब रिजल्ट का दिन आता था, तो जनता के वोटों की आंधी में सब कुछ बदल जाता था।

रीति ने कहा—"गुरुकुल में हम सभी क्लासिकल और सेमी-क्लासिकल सिंगर थे, जो सुरों की बारीकियों पर अपनी जान छिड़कते थे। काजी तकनीकी रूप से हम सबसे कमजोर सिंगर माने जाते थे और जजों से उन्हें अक्सर डांट पड़ती थी। लेकिन जब वोटिंग लाइन्स खुलती थीं, तो देश भर से काजी के लिए करोड़ों वोट्स बरसते थे। उस समय एक 18-19 साल की लड़की के रूप में मुझे यह बात अंदर तक कचोटती थी। मैं यह मानने से बिल्कुल नहीं डरती कि उस वक्त मैं काजी से जलने लगी थी। मुझे लगता था कि हम इतनी मेहनत कर रहे हैं और सारी वाहवाही, प्यार और वोट्स काजी को मिल रहे हैं।"

वो जलन नहीं, एक युवा कलाकार की असुरक्षा थी

रीति ने आगे अपनी मानसिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि उम्र के उस कच्चे पड़ाव पर जब आप एक बड़े कॉम्पिटिशन में होते हैं, तो यह समझ नहीं आता कि शोबिज की दुनिया सिर्फ सुरों से नहीं, बल्कि स्क्रीन प्रेजेंस और करिश्मे से भी चलती है।

उन्होंने कहा कि काजी तौकीर के पास एक ऐसा 'एक्स-फैक्टर' (X-Factor) था जो कैमरे के सामने आते ही दर्शकों को बांध लेता था। उनकी हेयरस्टाइल, उनका मासूमियत भरा अंदाज और आत्मविश्वास लोगों के दिलों को छू जाता था। रीति ने स्वीकार किया कि उस समय उन्हें इस बात की समझ नहीं थी और वे इसे अपनी मेहनत के साथ अन्याय समझती थीं। इसी वजह से गुरुकुल के अंदर कई प्रतियोगियों के बीच काजी को लेकर एक अनकहा तनाव और जलन का माहौल बन गया था।

'सालों बाद समझ आया स्टारडम का गणित': काजी के हुनर का किया सम्मान

समय बीतने और इंडस्ट्री में लंबा तजुर्बा हासिल करने के बाद रीति तिवारी का नजरिया पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने कहा कि आज जब वे पीछे मुड़कर देखती हैं, तो उन्हें काजी की उस ताकत का अहसास होता है जिसे उस समय बाकी कंटेस्टेंट्स नहीं समझ पाए थे।

रीति ने कहा—"आज मैं पूरे सम्मान के साथ कह सकती हूं कि काजी एक पैदाइशी रॉकस्टार थे। गाना गाना एक कला है, लेकिन उस गाने को करोड़ों लोगों के दिलों तक पहुंचाना और खुद को एक ब्रैंड बनाना एक अलग ही प्रतिभा है। काजी ने उस समय जो स्टारडम जिया, वह हर किसी के नसीब में नहीं होता। मुझे आज उस जलन को स्वीकार करने में कोई शर्मिंदगी नहीं है, क्योंकि उसी अनुभव ने मुझे जिंदगी में आगे चलकर एक ज्यादा परिपक्व और समझदार इंसान बनाया।"

सोशल मीडिया पर रीति की बेबाकी की तारीफ

रीति तिवारी का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर संगीत प्रेमियों और 90s के दर्शकों के बीच पुरानी यादें ताजा हो गई हैं। फैंस रीति की इस असाधारण ईमानदारी और आत्ममंथन की जमकर तारीफ कर रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि अपनी ईर्ष्या और असुरक्षा को सार्वजनिक मंच पर स्वीकार करने के लिए बहुत बड़े दिल और साहस की जरूरत होती है।

'फेम गुरुकुल' के दौर को याद करते हुए कई लोगों ने कमेंट किया कि उस शो ने भारतीय टेलीविजन को असल मायनों में रियलिटी का मतलब सिखाया था। रीति तिवारी का यह खुलासा यह साबित करता है कि ग्लैमर की चकाचौंध के पीछे कलाकारों के मन में भी आम इंसानों जैसी भावनाएं, डर और असुरक्षाएं होती हैं, जिन्हें समय के साथ ही सही रूप में समझा जा सकता है।