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October 06 2026 08:03 pm

खाड़ी में हूतियों से तनाव के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब में बढ़ाई फौजी ताकत: मक्का पैक्ट के तहत अतिरिक्त ब्रिगेड रवाना

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लाल सागर, यमन सीमा और फारस की खाड़ी के मुहाने पर हूती विद्रोहियों के आक्रामक तेवरों ने पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध का नया मोर्चा खोल दिया है। हूतियों द्वारा सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र को नागरिक उड़ानों के लिए 'असुरक्षित' घोषित करने और सीमावर्ती ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमलों के खतरे के बीच पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपनी फौजी मौजूदगी को व्यापक स्तर पर बढ़ाना शुरू कर दिया है।

हाल ही में सक्रिय हुए 'मक्का रक्षा समझौते' (Mecca Joint Defence Agreement) के प्रावधानों के तहत पाकिस्तानी सेना ने अपनी अतिरिक्त इन्फैंट्री ब्रिगेड, स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) कमांडो और एयर डिफेंस विशेषज्ञों के दस्तों को सऊदी अरब के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर तैनात करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। रक्षा जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी बड़े संभावित क्षेत्रीय टकराव के मद्देनजर एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार करने की कवायद है।

अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियां और एयर डिफेंस यूनिट्स की तैनाती

राजनयिक और सैन्य सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की इस नई तैनाती का मुख्य फोकस सऊदी अरब के संवेदनशील बुनियादी ढांचों की आंतरिक और सीमावर्ती सुरक्षा को चाक-चौबंद करना है:

तबुक और खमीस मुशायत एयरबेस: दक्षिणी और पश्चिमी सऊदी अरब के उन एयरबेसों पर पाकिस्तानी तकनीकी टीमों और सुरक्षा दस्तों की संख्या बढ़ाई गई है, जो यमन से आने वाले ड्रोनों के रडार पाथ पर स्थित हैं।

क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की हिफाजत: सऊदी अरामको के प्रमुख तेल प्रतिष्ठानों, अल-खर्ज मिलिट्री सिटी और लाल सागर तट के बंदरगाहों के आसपास सुरक्षा लेयर को मजबूत किया गया है।

रडार व एंटी-ड्रोन इंटरसेप्शन: पाकिस्तानी वायुसेना (PAF) के एयर डिफेंस ऑपरेटरों को सऊदी एयर डिफेंस फोर्सेज के साथ संयुक्त रूप से लो-एल्टीट्यूड (कम ऊंचाई पर उड़ने वाले) हूती ड्रोनों को ट्रैक करने के काम में लगाया जा रहा है।

क्या यमन के भीतर जमीनी जंग में उतरेगी पाकिस्तानी सेना?

इस भारी सैन्य जमावड़े के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या पाकिस्तानी सैनिक यमन के भीतर हूतियों के खिलाफ जमीनी कार्रवाई करेंगे?

सैन्य रणनीतिकारों के अनुसार, पाकिस्तान ने इस संबंध में बेहद नपा-तुला रुख अपनाया है:

सऊदी सीमा तक सीमित दायित्व: मक्का रक्षा समझौते का मुख्य फ्रेमवर्क सऊदी अरब की क्षेत्रीय संप्रभुता (Territorial Integrity) और पवित्र स्थलों की हिफाजत पर केंद्रित है। पाकिस्तानी सेना सऊदी अरब की सीमा के भीतर रक्षात्मक (Defensive) मोर्चे पर ही तैनात रहेगी।

यमन में सीधे प्रवेश से परहेज: पाकिस्तान 2015 की अपनी संसद की उस नीति से पूरी तरह नहीं भटका है, जिसमें यमन के आंतरिक संघर्ष में सीधे तौर पर उलझने से बचने की सिफारिश की गई थी। इसके अलावा, पाकिस्तान अपने पड़ोसी ईरान के साथ सीधे सीमा विवाद या कूटनीतिक दरार नहीं चाहता।

सऊदी सैनिकों को अग्रिम मोर्चे की छूट: पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा आंतरिक सुरक्षा, चौकियों और एयरबेसों का जिम्मा संभालने से सऊदी अरब की अपनी सेना (RSLF) यमन सीमा और 'ऑपरेशन यमन डॉन' के अग्रिम मोर्चों पर पूरी ताकत लगाने के लिए स्वतंत्र हो गई है।

वित्तीय मजबूरियां और रियाद का कड़ा दबाव

पाकिस्तान के इस तेजी से उठाए गए कदम के पीछे उसकी अपनी आर्थिक और भू-राजनीतिक मजबूरियां भी हैं।

सऊदी अरब का भारी निवेश और कर्ज: पाकिस्तान का केंद्रीय बैंक सऊदी अरब द्वारा रखे गए अरबों डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार और सस्ते तेल की आपूर्ति पर बहुत हद तक निर्भर है।

अतीत की हिचकिचाहट की भरपाई: पूर्व में जब पाकिस्तान ने यमन युद्ध में सेना भेजने से झिझक दिखाई थी, तब सऊदी-पाक संबंधों में गहरी कड़वाहट आ गई थी। जनरल असीम मुनीर और शहबाज शरीफ सरकार इस बार किसी भी तरह का जोखिम न लेते हुए रियाद की सुरक्षा जरूरतों को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं।

खाड़ी में युद्ध की आशंका और बढ़ता तनाव

हूतियों ने पहले ही ऐलान किया है कि वे सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के सैन्य ठिकानों को बख्शने के मूड में नहीं हैं। तुर्किए द्वारा ड्रोन तकनीक और निगरानी उपकरण मुहैया कराने तथा पाकिस्तान द्वारा भारी सैन्य बूट्स ग्राउंड पर उतारने से यह त्रिपक्षीय गठबंधन हूतियों और उनके पीछे खड़ी ताकतों को एक कड़ा संदेश देने की कोशिश कर रहा है।

यदि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के भीतर कोई बड़ा हमला किया, तो मक्का पैक्ट के तहत होने वाली संयुक्त जवाबी कार्रवाई पूरे मध्य पूर्व को एक बड़े बहुराष्ट्रीय युद्ध की आग में झोंक सकती है।