करूर भगदड़: मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी दे सकेगी विजय सरकार, मद्रास HC का बड़ा फैसला
चेन्नई: तमिलनाडु की सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार को न्यायपालिका से एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी अंतरिम राहत मिली है। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने शुक्रवार को करूर रैली में मची दर्दनाक भगदड़ में जान गंवाने वाले 41 पीड़ितों के आश्रितों को सरकारी नौकरी मुहैया कराने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ तौर पर इनकार कर दिया है। अदालत के इस फैसले से मुख्यमंत्री विजय की अगुवाई वाली सरकार ने बड़ी राहत की सांस ली है। हालांकि, माननीय न्यायालय ने इस आदेश के साथ कुछ विशेष कानूनी शर्तें भी जोड़ी हैं, जिनके तहत ये नियुक्तियां पूरी तरह से अस्थायी मानी जाएंगी।
कोर्ट ने नीतिगत फैसले में दखल से किया इनकार: नियुक्तियों पर लगाईं कुछ विशेष शर्तें
मामले की गंभीरता को देखते हुए जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल की खंडपीठ ने इस जनहित याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वे इस शुरुआती स्तर पर राज्य सरकार द्वारा जनहित में लिए गए किसी भी नीतिगत फैसले (Policy Decision) में सीधे तौर पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहते। हालांकि, कोर्ट ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली ये सभी सरकारी नियुक्तियां पूरी तरह से अस्थायी (Provisional) होंगी और इस मामले में आने वाले अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। इसके साथ ही बेंच ने यह भी निर्देश दिया है कि नियुक्त किए गए लाभार्थियों को उनके पहले महीने का वेतन जारी होने से पहले इस मुख्य याचिका पर एक बार फिर विस्तृत सुनवाई की जाएगी।
TNPSC को बनाया प्रतिवादी: सीबीआई (CBI) को भी कोर्ट ने जारी किया औपचारिक नोटिस
मद्रास हाई कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में पारदर्शिता और कानूनी नियमों को सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए तमिलनाडु लोक सेवा आयोग (TNPSC) को भी इस पूरे विधिक मामले में एक मुख्य प्रतिवादी के रूप में शामिल किया है। इसके अतिरिक्त, देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में करूर भगदड़ हादसे की उच्च स्तरीय जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को भी हाई कोर्ट ने एक औपचारिक नोटिस जारी करने का सख्त निर्देश दिया है, ताकि जांच से जुड़े सभी पहलुओं को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
अब 21 जुलाई को होगी अगली महा-सुनवाई: पूरे तमिलनाडु की नजरें अदालत पर टिकीं
करूर में आयोजित एक राजनीतिक रैली के दौरान मची इस भयंकर भगदड़ ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसमें 41 मासूम लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस हादसे के बाद विजय सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवारों के भरण-पोषण के लिए सरकारी नौकरी देने का ऐतिहासिक एलान किया था, जिसे कुछ याचिकाकर्ताओं ने अदालत में चुनौती दी थी। अब इस पूरे मामले में कानूनी दांव-पेच और सरकार के पक्ष को लेकर अगली विस्तृत सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, जिस पर पूरे तमिलनाडु की राजनीतिक और सामाजिक संस्थाओं की पैनी नजरें टिकी हुई हैं।