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July 10 2026 11:38 pm

$1.4$ अरब डॉलर के अमेरिकी रडार ने पलक झपकते ही ट्रैक की ड्रैगन की चाल

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दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में अपनी सैन्य ताकत का धौंस जमाने और दुनिया से अपनी मिसाइल टेस्टिंग को छिपाने की फिराक में जुटे चीन को ताइवान ने एक बहुत बड़ा और करारा झटका दिया है। ताइवान के सबसे आधुनिक और बेहद शक्तिशाली लॉन्ग-रेंज अर्ली-वार्निंग रडार ने दक्षिण चीन सागर में एक चीनी परमाणु पनडुब्बी से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को लॉन्च होते ही सफलतापूर्वक ट्रैक (निगरानी) कर लिया है। 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे लाइव ऑपरेशन के दौरान ताइवान ने एक कदम आगे बढ़कर अमेरिका (USA) के साथ मिसाइल ट्रैकिंग की रियल-टाइम खुफिया जानकारी साझा की है, जिसने ड्रैगन की रातों की नींद उड़ा दी है।

ताइवान के सुरक्षा प्रमुख का बड़ा दावा: परमाणु पनडुब्बी से दागी गई थी खतरनाक JL-2 बैलिस्टिक मिसाइल

चीन ने हमेशा की तरह इस बार भी इस बात को पूरी तरह गुप्त रखा है कि उसने किस घातक मिसाइल का गुप्त परीक्षण किया था। लेकिन ताइवान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के महासचिव जोसेफ वू ने वाशिंगटन में रणनीतिक जानकारी देते हुए बड़ा दावा किया है कि यह संभवतः चीन की सबसे घातक सबमरीन-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल JL-2 थी। यह खुफिया जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब ताइवान की सेना चीनी नौसेना द्वारा संभावित पूर्ण नाकाबंदी, बड़े पैमाने पर साइबर हमलों और हवाई आक्रमण जैसी सबसे खराब स्थितियों से निपटने के लिए एक बड़ा सैन्य अभ्यास कर रही है, जिसके कारण पूरे ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) में निगरानी प्रणालियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

लेशान स्टेशन का 'Pave Paws' रडार: 5,000 किलोमीटर दूर तक ड्रैगन की हर हरकत पर नजर

ताइवान के प्रमुख अखबार 'लिबर्टी टाइम्स' ने एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि इस पूरे ऑपरेशन को ताइवान के पहाड़ी इलाके में तैनात AN/FPS-115 Pave Paws अर्ली-वार्निंग रडार ने अंजाम दिया है। ह्सिनचू काउंटी के लेशान रडार स्टेशन पर समुद्र तल से 2,600 मीटर की दुर्गम ऊंचाई पर स्थापित यह रडार बेहद अत्याधुनिक है। इसकी मारक और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी क्षमता लगभग 5,000 किलोमीटर तक है। इतनी विशाल रेंज होने के कारण यह रडार सिस्टम ताइवान में बैठे-बैठे ही मुख्यभूमि चीन, पूरे दक्षिण चीन सागर और कोरियाई प्रायद्वीप में होने वाले किसी भी छोटे से छोटे मिसाइल लॉन्च या फाइटर जेट की गतिविधि को पलक झपकते ही पकड़ लेता है।

$1.4$ अरब डॉलर का महा-रडार: रेथियॉन कंपनी ने ताइवान के लिए किया था विशेष अपग्रेड

अमेरिकी रक्षा क्षेत्र के सबसे बड़े ठेकेदार 'रेथियॉन' (Raytheon) द्वारा विकसित यह AN/FPS-115 Pave Paws रडार साल 2013 में ताइवान की सेना में पूरी तरह से चालू हुआ था। $1.4$ अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक) की भारी-भरकम लागत से बने इस रडार को हाल ही में एक विशेष अपग्रेड मिला है। इस अपग्रेड के बाद यह रडार आसमान में बेहद कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों और सामरिक (टैक्टिकल) बैलिस्टिक मिसाइलों का भी सटीक पता लगा सकता है। बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक करने के अलावा, यह ताइवान जलडमरूमध्य में चीनी जहाजों और समुद्री गतिविधियों की भी 24 घंटे लाइव मॉनिटरिंग करता है।

युद्ध की स्थिति में चीन का पहला निशाना: सुरक्षा विशेषज्ञों ने कतर और ईरान के उदाहरण से चेताया

1.4 अरब डॉलर का यह रडार ताइवान की हवाई रक्षा प्रणाली की रीढ़ की हड्डी और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के साथ किसी भी संभावित युद्ध की स्थिति में सबसे बड़ा हथियार है। हालांकि, इसकी इसी महा-शक्ति के कारण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच एक बड़ी चिंता भी पैदा हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन और ताइवान के बीच पूर्ण युद्ध छिड़ता है, तो चीनी सेना सबसे पहले इस रडार स्टेशन को नष्ट करने के लिए मिसाइलें दागेगी। यह डर इसलिए भी गहरा गया है क्योंकि हाल ही में आई खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, कतर में स्थित अमेरिका के इसी तरह के एक अपग्रेडेड अर्ली-वार्निंग रडार स्टेशन को इस साल की शुरुआत में एक ईरानी मिसाइल हमले के दौरान भारी नुकसान पहुंचा था।