Vastu Tips for Shankh: क्या आपके मंदिर में भी गलत दिशा में रखा है शंख? कंगाली से बचने के लिए तुरंत सुधारें ये वास्तु दोष

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India News Live,Digital Desk : हिंदू धर्म में पूजा के स्थान पर 'शंख' (Shankh) का होना केवल परंपरा नहीं, बल्कि सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों में शंख को माता लक्ष्मी का भाई और भगवान विष्णु का प्रिय आयुध बताया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत दिशा में रखा गया शंख आपके घर की शांति भंग कर सकता है? वास्तु शास्त्र के अनुसार, शंख रखने के कुछ कड़े नियम हैं, जिनका पालन न करने पर सकारात्मक ऊर्जा की जगह नकारात्मकता पैर पसारने लगती है। आइए जानते हैं शंख स्थापना के सही नियम और दिशा।

शंख रखने की सबसे शुभ दिशा: 'ईशान कोण' है सर्वोत्तम

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मंदिर में शंख स्थापित करने के लिए 'ईशान कोण' (उत्तर-पूर्व दिशा) सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

कारण: ईशान कोण को देवताओं की दिशा माना जाता है। यहाँ सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है।

लाभ: इस दिशा में शंख रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है, जिससे घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।

भूलकर भी इस दिशा में न रखें शंख, बढ़ सकती है मुसीबत!

वास्तु नियमों के मुताबिक, शंख को कभी भी दक्षिण दिशा (South Direction) में नहीं रखना चाहिए।

नुकसान: दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है। यहाँ शंख रखने से घर में कलह, मानसिक तनाव और आर्थिक उन्नति में बाधाएं आ सकती हैं।

सावधानी: ध्यान रखें कि शंख का खुला हुआ हिस्सा हमेशा ऊपर की ओर या आकाश की तरफ होना चाहिए।

शंख की पवित्रता और साफ-सफाई के नियम (Vastu Rules for Shankh)

अक्सर लोग मंदिर में शंख सजा तो देते हैं, लेकिन उसकी पवित्रता का ध्यान नहीं रखते। वास्तु के अनुसार ये गलतियां भारी पड़ सकती हैं:

नियमित सफाई: हफ्ते में कम से कम एक बार शंख को गंगाजल से स्नान कराएं। यदि गंगाजल न हो, तो ताजे और शुद्ध जल का प्रयोग करें।

दो शंखों का नियम: एक ही मंदिर में दो शंख कभी नहीं रखने चाहिए। यदि आपके पास दो शंख हैं, तो एक को बजाने के लिए और दूसरे को केवल अभिषेक या जल भरने के लिए अलग रखें।

बजाने के बाद धोना: शंख बजाने के बाद उसे तुरंत साफ पानी से धोकर ही वापस मंदिर में स्थापित करना चाहिए।

घर में शंख रखने और बजाने के चमत्कारिक फायदे

वास्तु दोष का नाश: शंख की उपस्थिति मात्र से घर के कई सूक्ष्म वास्तु दोष स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।

नकारात्मकता की विदाई: शंख की ध्वनि से निकलने वाली तरंगें वातावरण में मौजूद हानिकारक कीटाणुओं और नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती हैं।

लक्ष्मी का वास: जिस घर में नियमित रूप से शंख की पूजा होती है, वहां दरिद्रता कभी प्रवेश नहीं करती और माता लक्ष्मी का स्थाई वास होता है।