Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026: पैसों की तंगी और कर्ज से चाहिए छुटकारा? चतुर्थी पर करें इस 'चमत्कारी स्तोत्र' का पाठ, बरसेगी बप्पा की कृपा
India News Live,Digital Desk : वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को 'भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी' के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में यह पावन पर्व 06 मार्च (शुक्रवार) को पड़ रहा है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि भगवान गणेश को 'संकटमोचन' माना गया है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखते हैं और गणपति की आराधना करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता और दुखों का नाश होता है। विशेष रूप से यदि आप आर्थिक तंगी या कर्ज के बोझ से दबे हैं, तो आज का दिन आपके लिए वरदान साबित हो सकता है।
आर्थिक संकट दूर करने का 'रामबाण' उपाय: ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की षोडशोपचार पूजा करने के बाद 'ऋणहर्ता श्री गणेश स्तोत्र' का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस स्तोत्र के प्रभाव से व्यक्ति कुबेर के समान धनवान बन सकता है और उसके जीवन से 'दारुण दरिद्र' (घोर गरीबी) का अंत होता है।
ऋणहर्ता श्री गणेश स्तोत्र के कुछ प्रमुख अंश:
सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फलसिद्धये।
सदैव पार्वतीपुत्र ऋणनाशं करोतु मे॥
(अर्थ: सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी ने जिनकी पूजा की, वे माता पार्वती के पुत्र मेरे ऋण का नाश करें।)
इस स्तोत्र में बताया गया है कि कैसे भगवान शिव, विष्णु, दुर्गा और कार्तिकेय ने भी अपने संकटों के निवारण के लिए गणेश जी की स्तुति की थी।
कर्ज मुक्ति के लिए 'ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र' भी है प्रभावी
यदि आप पर भारी कर्ज है, तो पूजा के समय 'ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्र' का पाठ करना न भूलें। फलश्रुति के अनुसार, जो व्यक्ति तीन संध्याओं (सुबह, दोपहर, शाम) में इसका पाठ करता है, वह 6 महीने के भीतर ऋण मुक्त हो जाता है।
भालचंद्र चतुर्थी पर पूजा के विशेष मंत्र
बप्पा को प्रसन्न करने के लिए पूजा के दौरान इन मंत्रों का जप करें:
विघ्न बाधा दूर करने हेतु: ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा॥
सफलता हेतु: गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः। द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः॥
पूजा विधि और नियम: रखें इन बातों का ध्यान
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल वस्त्र पहनें।
गणेश स्थापना: ईशान कोण में चौकी बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें और उन्हें सिंदूर, दूर्वा, और मोदक अर्पित करें।
स्तोत्र पाठ: शांत चित्त से 'ऋणहर्ता स्तोत्र' का कम से कम एक या 11 बार पाठ करें।
चंद्र दर्शन: संकष्टी चतुर्थी में चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना व्रत पूर्ण नहीं होता। रात को चंद्रोदय के समय जल में दूध और अक्षत डालकर अर्घ्य दें।