Vastu Tips For Puja Ghar: घर के मंदिर के लिए वास्तु के अचूक नियम; जानें किस देवता के लिए कौन सी दिशा है श्रेष्ठ

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India News Live,Digital Desk : वास्तु शास्त्र में घर के मंदिर या पूजा स्थल को सबसे अधिक ऊर्जावान केंद्र माना गया है। वास्तुविद अनीता जैन के अनुसार, यदि पूजा घर का स्थान और दिशा सही न हो, तो व्यक्ति की आध्यात्मिक साधना और मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए वास्तु के इन विधानों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।

1. पूजा घर के लिए सबसे शुभ दिशा

वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को देवताओं की दिशा माना गया है।

महत्व: यह दिशा पूर्व (ज्ञान) और उत्तर (धन) का संगम है। यहाँ सत्व ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है।

लाभ: ईशान कोण में मंदिर होने से घर के सदस्यों को मानसिक स्पष्टता, शांति और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है।

2. पूजा करते समय मुख की दिशा

पूजा के दौरान आपके बैठने की दिशा आपके संकल्प की सिद्धि तय करती है:

पूर्व दिशा: यदि आप ज्ञान, आत्मिक शांति और एकाग्रता चाहते हैं, तो पूर्व की ओर मुख करके पूजा करें।

उत्तर दिशा: यदि आपका उद्देश्य धन प्राप्ति, व्यापार में वृद्धि या भौतिक सुख है, तो उत्तर की ओर मुख करना श्रेष्ठ है।

3. किस दिशा में हो किस देवता का वास?

वास्तु के अनुसार, अलग-अलग देवताओं की उपासना के लिए विशिष्ट दिशाएं निर्धारित हैं:

दिशाआराध्य देवी-देवताफल
उत्तर-पूर्वशिव परिवार, राधा-कृष्णआत्मिक सुख और शांति
पूर्वश्री राम दरबार, विष्णु जी, सूर्य देवमान-सम्मान और प्रगति
उत्तरलक्ष्मी जी, गणेश जी, कुबेर देवधन और वैभव
दक्षिणहनुमान जी, दुर्गा माँ (काली रूप)संकटों से रक्षा और शक्ति
पश्चिमगुरु, बुद्ध, महावीर स्वामीस्थिरता और अंतर्ज्ञान
दक्षिण-पश्चिमपितृ (पूर्वज)परिवार का आशीर्वाद और सुरक्षा

4. पूजा घर के रंग और सजावट

रंग: मंदिर की दीवारों पर हमेशा सात्विक रंगों का प्रयोग करें, जैसे— हल्का पीला, क्रीम, सफेद या हल्का हरा। ये रंग मन को शांत और एकाग्र रखते हैं।

ऊर्जा के स्रोत: पूजा घर में नियमित रूप से दीपक जलाएं और शंख रखें। शंख की ध्वनि से घर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।

5. भूलकर भी न करें ये गलतियां (सावधानियां)

शौचालय के पास मंदिर: पूजा घर कभी भी शौचालय के ऊपर, नीचे या उससे सटी दीवार पर नहीं होना चाहिए।

खंडित मूर्तियां: मंदिर में टूटी हुई मूर्तियां या फटी तस्वीरें न रखें, इन्हें तुरंत जल विसर्जित करें।

पितरों की तस्वीर: भगवान के साथ कभी भी पूर्वजों या पितरों की तस्वीरें न लगाएं; उनका स्थान दक्षिण-पश्चिम की दीवार पर अलग होना चाहिए।

हिंसक चित्र: महाभारत के युद्ध, हिंसक पशु-पक्षियों या उदासी भरे चित्र मंदिर में न रखें।

भंडारण: पूजा स्थल को स्टोर रूम न बनाएं और यहाँ धन या कीमती वस्तुएं छिपाकर न रखें।